छत्तीसगढ़ के सिविल इंजीनियरों ने आवश्यक अंक प्राप्त करने के बाद लगभग 15 वर्षों तक सेवा के बाद अब उन्हें अचानक अपनी नौकरी तथा आजीविका खोने का गंभीर खतरा उत्पन्न ……
नई दिल्ली । विंध्यलीडर संवाददाता । माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के 80 से अधिक सिविल इंजीनियरों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए FIR संख्या 225/2026 में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी। यह FIR उन सिविल इंजीनियरों के विरुद्ध दर्ज की गई थी, जिनका चयन सब-इंजीनियर (सिविल) के पद पर हुआ था, जबकि विज्ञापन की तिथि तक उनके पास निर्धारित आवश्यक योग्यता नहीं थी।
सिविल इंजीनियरों की ओर से यह तर्क दिया गया कि :
1. विज्ञापन में योग्यता के लिए कोई कट-ऑफ तिथि निर्धारित नहीं की गई थी;
2. दस्तावेजों के सत्यापन से पहले ही उन्होंने आवश्यक योग्यता प्राप्त कर ली थी;
3. उनका चयन मेरिट के आधार पर हुआ था; और
4. सरकार ने एक आदेश जारी कर इन सिविल इंजीनियरों की बाद में प्राप्त की गई योग्यता को भी विचार में लेने का निर्देश दिया था, जिसे किसी ने चुनौती नहीं दी थी।
इन सिविल इंजीनियरों ने आवश्यक अंक प्राप्त करने के बाद लगभग 15 वर्षों तक सेवा की थी और अब उन्हें अचानक अपनी नौकरी तथा आजीविका खोने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।
मामला Tulika Sharma & Ors. v. State of Chhattisgarh & Ors., SLP (Crl.) Diary No. 47204/2026 के रूप में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आया। मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और माननीय न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की। यह याचिका छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा 27.07.2026 को CRMP No. 1919 of 2026 में दिए गए उस निर्णय के विरुद्ध दायर की गई थी, जिसमें FIR को निरस्त करने से इनकार कर दिया गया था।
इस मामले में अधिवक्ता जिन्होंने महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, मुंबई की स्नातक हैं, ने अपना पक्ष रखा। इससे पहले उन्होंने इसी वर्ष SLP(C) 6065/2025 के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। यह याचिका उन सिविल इंजीनियरों के चयन को चुनौती देने वाली रिट कार्यवाही से उत्पन्न हुई थी, जिसमें उनकी नियुक्तियां समाप्त करने की कार्यवाही पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी।



