उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग में अचानक बढ़ोतरी के लिए कारण धीमी बारिश बताया जा रहा है, जिससे विभाग को आपूर्ति बनाए …और पढ़ें
सोनभद्र । विंध्यलीडर संवाददाता । प्रदेश में बारिश की रफ्तार धीमी पड़ते ही बिजली की मांग में अचानक बढ़ोतरी हो गई है। तीन दिन की तुलना में नौ सितंबर को बिजली की खपत में लगभग 100 मिलियन यूनिट से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे प्रदेश में निर्बाध गति से बिजली आपूर्ति बनाए रखना बिजली प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया।
मांग बढ़ने के बीच आज शाम तक आईपीपी और सार्वजनिक क्षेत्र की नौ इकाइयों से कुल 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप रहा। उत्पादन में आई इस बड़ी कमी ने प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दीं हैं। बिजली की बढ़ती मांग और उत्पादन में कमी के बीच आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए प्रबंधन को निजी एवं केंद्रीय सेक्टरों से अतिरिक्त बिजली को महंगेदरों पर खरीदनी पड़ी।
प्रदेश के उपभोक्ताओं को आपूर्ति सुलभ कराने के उद्देश्य से बिजली प्रबंधन को अपेक्षाकृत महंगी बिजली की खरीदनी पड़ी। बारिश के दौरान मांग में आई कमी से जहां बिजली प्रबंधन को कुछ राहत मिली थी, वहीं मौसम साफ होते ही बढ़ी खपत ने एक बार फिर प्रबंधन पर दबाव बढ़ा दिया है।

आज शाम तक बंद रहने वाली इकाइयों में पीपीजीसीएल बारा की इकाई संख्या दो, आरपीएससीएल रोजा की इकाई संख्या दो, घाटमपुर परियोजना की इकाई संख्या एक, हरदुआगंज की इकाई संख्या आठ और नौ, ओबरा परियोजना की इकाई संख्या 11, मेजा परियोजना की इकाई संख्या एक तथा ओबरा ‘सी’ परियोजना की इकाई संख्या एक और दो शामिल रहीं। खास बात यह है कि ओबरा ‘सी’ की दोनों इकाइयों के बंद होने से 1320 मेगावाट क्षमता का उत्पादन प्रभावित है।
वहीं प्रदेश की अन्य परियोजनाओं में भी इकाइयों के बंद रहने से उपलब्ध उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा है। ऐसे में मांग और उपलब्ध बिजली के बीच अंतर को पाटने के लिए प्रबंधन को वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ा। आने वाले दिनों में मौसम और बिजली की मांग की स्थिति के साथ बंद इकाइयों की बहाली आपूर्ति व्यवस्था के लिए अहम मानी जा रही है।



