—बढ़ौली आदर्श तालाब से DM कटरा रोड तक प्लास्टिक जलाने की भयावह हकीकत
सोनभद्र।
बढ़ौली आदर्श तालाब से होते हुए DM कटरा तक जाने वाली सड़क पर सुबह-सुबह नगर पालिका के कर्मचारी झाड़ू लगाकर कूड़ा इकट्ठा तो कर लेते हैं, लेकिन उसके बाद जो होता है वह किसी भी जिम्मेदार शहरी व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। सड़क पर निकले प्लास्टिक को सुरक्षित निस्तारण के बजाय खुले में ही आग लगा दी जाती है। ओवरब्रिज के नीचे तो यह एक नियमित ‘प्रथा’ बन चुकी है—जहाँ रोज़ाना भारी मात्रा में प्लास्टिक सुलगता है और इसके जहरीले धुएँ में पूरा इलाका लिपट जाता है।

यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि शासनादेशों की सीधी अवमानना है। स्वच्छ भारत मिशन, नगर विकास मंत्रालय तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड—सभी यह स्पष्ट निर्देश देते हैं कि प्लास्टिक, रबर, पॉलीथिन या किसी भी विषैले पदार्थ को खुले में जलाना अपराध है। इसका उल्लंघन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय है।

प्लास्टिक जलने से निकलने वाला डाइऑक्सिन, फ्यूरान, और बारीक जहरीले कण हवा में मिलकर गंभीर बीमारियों को आमंत्रित करते हैं—कैंसर, दमा, दिल की समस्याएं, फेफड़ों का संक्रमण, बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का घटना—ये सब प्रत्यक्ष दुष्परिणाम हैं। सुबह टहलने वाले बुज़ुर्ग, दुकानें खोलने वाले व्यापारी, और आसपास रहने वाले बच्चे–महिलाएं रोज़ाना इस ज़हरीली हवा को सांस में उतारने को मजबूर हैं।

नगर पालिका रॉबर्ट्सगंज द्वारा नियमों की ऐसी धज्जियाँ उड़ाना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। जनता में आक्रोश बढ़ना स्वाभाविक है और सिस्टम के प्रति बगावती तेवर उभरना समझ में आता है।

अब समय आ गया है कि अधिकारी तत्काल निरीक्षण करें, जिम्मेदार कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई हो, और प्लास्टिक निस्तारण का वैज्ञानिक तरीका अपनाया जाए। वरना यह ‘सफाई अभियान’ नहीं, शहर को धीरे-धीरे जहर पिलाने की व्यवस्था बन जाएगा।




