सोनभद्र: न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सोनभद्र ने चंदन दूबे द्वारा दायर याचिका में दिनांक 12 अगस्त 2026 को आदेश पारित कर पुलिस को मामले की विवेचना करने का आदेश दिया है । आवेदक चंदन दूबे ने धारा 173(4) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत न्यायलय में प्रार्थना पत्र दायर कर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी।

आवेदक का आरोप है कि मेसर्स ओमैक्स मिनरल्स प्रा.लि. के निदेशक सचिन अग्रवाल के पक्ष में ग्राम खेबंधा, थाना जुगैल, तहसील ओबरा, जिला सोनभद्र के आराजी संख्या 246 खण्ड-स में 7 हेक्टेयर क्षेत्र पर बालू/मोरंग का पांच वर्षीय खनन पट्टा 9 जनवरी 2023 से 8 जनवरी 2028 तक स्वीकृत हुआ है । उक्त पट्टे की रजिस्ट्री 23 जनवरी 2023 को हुई, जिसमें सचिन अग्रवाल ने निदेशक के रूप में स्टांप पर हस्ताक्षर किए और फोटो खिंचवाई। जबकि उन्होंने 14 नवंबर 2022 को ही ओमेक्स मिनरल प्राइवेट लिमिटेड नामक उक्त कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था ऐसे में उक्त सचिन अग्रवाल ज़ब उक्त तिथि को डाइरेक्टर थे ही नहीं तब उन्होंने डाइरेक्टर के रूप में पट्टा विलेख पर हस्ताक्षर बना कर जलसाजी की है ।
आवेदक चंदन दुबे का कहना है कि निदेशक पद पर न रहते हुए भी सचिन अग्रवाल ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री विभाग में सरकारी दस्तावेजों पर फर्जी तरीके से निदेशक के रूप में हस्ताक्षर किए। कंपनी ने इसकी जानकारी खनिज विभाग, जिलाधिकारी कार्यालय या अन्य विभागों को नहीं दी। इससे भारी फर्जीवाड़ा और स्वार्थ सिद्धि का उन्होंने आरोप लगाया गया है।

आवेदक ने उक्त मामले पर थाना इलाका में शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 6 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक सोनभद्र सहित मुख्यमंत्री कार्यालय, अपर मुख्य सचिव भूतत्व एवं खनिकर्म, निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म, मंडलायुक्त विंध्याचल मंडल, पुलिस उप महानिरीक्षक मिर्जापुर और जिलाधिकारी सोनभद्र को रजिस्टर्ड डाक से प्रार्थना पत्र भेजा , फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब थक हार कर उन्होंने न्यायलय की शरण ली।
न्यायालय ने पत्रावली और दस्तावेजी साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोप गंभीर और संज्ञेय प्रकृति के हैं। जालसाजी, कपट और फर्जीवाड़े के ऐसे कृत्य जांच व विवेचना का विषय हैं। माननीय उच्चतम न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसले का हवाला देते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने के लिए बाध्य है।

न्यायालय ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष जुगैल, सोनभद्र को आदेश दिया कि प्रार्थना पत्र में कथित तथ्यों के आलोक में अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित करें।



