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Saturday, September 5, 2026

ओमैक्स मिनरल्स प्रा. लि. के निदेशक पर कथित फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज, खनन पट्टा रजिस्ट्री को लेकर उठे सवाल

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सोनभद्र। जुगैल थाना क्षेत्र में मे. ओमैक्स मिनरल्स प्रा. लि. से जुड़े एक कथित फर्जीवाड़े के मामले में कंपनी के निदेशक बताए गए सचिन अग्रवाल के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता चन्दन दुबे ने आरोप लगाया है कि निदेशक पद से इस्तीफा देने के बाद भी सचिन अग्रवाल ने कंपनी की ओर से खनन पट्टा रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेजों पर निदेशक के रूप में हस्ताक्षर किए।

प्राप्त शिकायत के अनुसार, मामला जुगैल थाना क्षेत्र के ग्राम खेवंधा स्थित आराजी संख्या 246, खंड-स, रकबा 7.00 हेक्टेयर भूमि से संबंधित बालू/मोरंग खनन पट्टे का है। शिकायतकर्ता के अनुसार उक्त खनन पट्टा मे. ओमैक्स मिनरल्स प्रा. लि. के पक्ष में पांच वर्ष की अवधि के लिए 9 जनवरी 2023 से 8 जनवरी 2028 तक स्वीकृत किया गया है।

  शिकायत में कहा गया है कि खनन पट्टे की रजिस्ट्री 23 जनवरी 2023 को कराई गई। आरोप है कि इस रजिस्ट्री के दौरान सचिन अग्रवाल ने कंपनी के निदेशक के रूप में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में स्वयं उपस्थित रहे। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित रजिस्ट्री डीड में हस्ताक्षर और फोटोग्राफ सहित अन्य अभिलेख उपलब्ध हैं।

इस्तीफे के बाद हस्ताक्षर करने का आरोप

  शिकायतकर्ता चन्दन दुबे द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि सचिन अग्रवाल ने कथित रूप से 14 नवंबर 2022 को कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बावजूद लगभग दो महीने बाद 23 जनवरी 2023 को खनन पट्टे की रजिस्ट्री के दौरान उन्होंने स्वयं को कंपनी का निदेशक बताते हुए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

  शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि इस्तीफा दिए जाने का तथ्य सही पाया जाता है, तो निदेशक पद पर न रहते हुए निदेशक के रूप में सरकारी एवं पंजीकरण संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आ सकता है।

अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी द्वारा इस संबंध में खनिज विभाग, जिलाधिकारी कार्यालय अथवा अन्य संबंधित विभागों को आवश्यक जानकारी नहीं दी गई। शिकायतकर्ता ने इसे कंपनी और संबंधित व्यक्ति के बीच कथित मिलीभगत का मामला बताते हुए विस्तृत जांच की मांग की है।

  न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ मामला

मामले में शिकायतकर्ता चन्दन दुबे की ओर से न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रकरण में अदालत के आदेश पर जुगैल थाने में भारतीय न्याय संहिता/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की संबंधित धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर क़ानूनी पहलुओं की जाँच शुरू कर दी गई है।

  मुकदमा दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण प्रश्न होंगे। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि सचिन अग्रवाल ने वास्तव में कब निदेशक पद से इस्तीफा दिया, इस्तीफे की कानूनी स्थिति क्या थी ? कंपनी के अभिलेखों में उस समय निदेशक के रूप में उनका दर्जा क्या था तथा खनन पट्टे की रजिस्ट्री के समय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का अधिकार किसके पास था ?

जांच में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस

मामले की जांच के दौरान निम्न बिंदुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जा रही है—

  • सचिन अग्रवाल के निदेशक पद से कथित इस्तीफे की वास्तविक तिथि और उसकी कानूनी वैधता ?
  • कंपनी के वैधानिक अभिलेखों में जनवरी 2023 के दौरान निदेशक पद की स्थिति ?
  • खनन पट्टा रजिस्ट्री के समय हस्ताक्षर करने के लिए किस व्यक्ति को अधिकृत किया गया था ?
  • रजिस्ट्री डीड, कंपनी के प्रस्ताव, प्राधिकरण पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणिकता ?
  • संबंधित विभागों को निदेशक पद में परिवर्तन की सूचना दी गई थी अथवा नहीं ?
  • शिकायत में लगाए गए कूटरचना, फर्जी हस्ताक्षर और कथित मिलीभगत के आरोपों की सत्यता की स्थिति ?

आरोपों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति

हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मुकदमा दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। पुलिस एवं संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

मामले में आरोपी पक्ष अथवा मे. ओमैक्स मिनरल्स प्रा. लि. का पक्ष नहीं जाना जा सका, क्योंकि नेटवर्क समस्या के कारण कंपनी के किसी भी व्यक्ति से सम्पर्क नहीं हो सका, फिलहाल जांच के निष्कर्ष और न्यायालय की आगे की कार्यवाही के बाद ही आरोपों की अंतिम सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।

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