15 C
Varanasi
Thursday, February 26, 2026

ओबरा में ‘शादी’ के स्टिकर वाली गाड़ियों से उतरी आयकर की फौज — खनन साम्राज्य पर अब तक की सबसे बड़ी चोट, हजारों करोड़ के काले खेल का हो सकता है पर्दाफाश?

spot_img
जरुर पढ़े


सोनभद्र/ओबरा। जनपद के औद्योगिक नगर ओबरा में बुधवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक के बाद एक दर्जन भर गाड़ियां शहर में दाखिल हुईं। गाड़ियों पर ‘शादी’ के स्टिकर लगे थे, जिससे आम लोगों को पहले पहल लगा कि कोई बारात आई है। लेकिन कुछ ही देर में साफ हो गया कि यह कोई बारात नहीं, बल्कि आयकर विभाग की विशेष जांच टीम है, जिसने एक साथ एक दर्जन से अधिक चर्चित खनन कारोबारियों के विभिन्न प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई में दो दर्जन से अधिक आयकर अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। टीम ने शहर के कई प्रमुख ठिकानों को एक साथ घेर लिया। कार्रवाई बुधवार से शुरू होकर देर रात तक जारी रही और गुरुवार को भी जांच की प्रक्रिया चलती रही। छापेमारी की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वाराणसी से PAC की एक बटालियन बुलाई गई, जबकि स्थानीय पुलिस ने बाहर सुरक्षा घेरा संभाल रखा था। किसी भी व्यक्ति को न तो अंदर जाने दिया गया और न ही बाहर निकलने की अनुमति थी।
लैपटॉप, सर्वर और बिलिंग रिकॉर्ड जब्त
जांच टीम ने प्रतिष्ठानों के भीतर मौजूद तमाम लैपटॉप, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, सर्वर और बिलिंग से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। शुरुआती पड़ताल में कंपनियों के माध्यम से जमीन की खरीद-फरोख्त, शेल कंपनियों के जरिये निवेश और कथित रूप से बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी से जुड़े अहम दस्तावेज हाथ लगने की चर्चा है।
यही नहीं, मिली जानकारी के अनुसार टीम ने ओबरा के अलावा डाला और बिल्ली मार्कुंडी क्षेत्र में संचालित दर्जनों क्रेशर प्लांटों पर भी दबिश दी। कई प्लांट ऐसे बताए जा रहे हैं, जो कागजों में बंद हैं लेकिन धरातल पर संचालन जारी है। इन स्थानों से भी आवश्यक कागजात और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं।


अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई?


सूत्रों का दावा है कि सोनभद्र जिले में आयकर विभाग की यह अब तक की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाई मानी जा रही है। अनुमान है कि यदि जब्त दस्तावेजों की गहराई से जांच हुई तो हजारों करोड़ रुपये के टैक्स चोरी और अवैध निवेश के खेल का खुलासा हो सकता है।
जिले का ओबरा–डाला–बिल्ली मार्कुंडी खनन बेल्ट लंबे समय से अवैध खनन, ओवरलोडिंग और फर्जी बिलिंग के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। आरोप यह भी लगते रहे हैं कि जिम्मेदार विभागों की कथित मिलीभगत से कई बंद घोषित क्रेशर प्लांट धड़ल्ले से चल रहे हैं। खदानों को ‘डेंजर जोन’ में तब्दील कर दिया गया है, जहां सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जाती रही है।


मिलीभगत’ के सवालों के घेरे में विभाग


स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खनन और क्रेशर प्लांटों के संचालन की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो, तो केवल कारोबारी ही नहीं, बल्कि संरक्षण देने वाले कई जिम्मेदार अधिकारी भी बेनकाब हो सकते हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर कागजों में बंद प्लांट वर्षों से कैसे संचालित हो रहे थे? अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक के दावों के बावजूद खदानों से निकलने वाला पत्थर किन रास्तों से बाजार तक पहुंच रहा था?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वित्तीय लेन-देन, बेनामी संपत्तियों और कंपनियों के बीच धन के प्रवाह की फोरेंसिक ऑडिट कराई जाए, तो काले धन के बड़े नेटवर्क का खुलासा संभव है। जरूरत है कि राज्य और केंद्र स्तर पर एक संयुक्त स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर खनन माफिया और उनसे जुड़े तंत्र की जड़ों तक पहुंचा जाए।


शादी’ के स्टिकर से शुरू हुआ ऑपरेशन


छापेमारी की रणनीति भी चर्चा का विषय बनी रही। जिन गाड़ियों से अधिकारी पहुंचे, उन पर ‘शादी’ के स्टिकर लगे थे। सुबह के समय लोगों को लगा कि कोई बारात आई है, लेकिन जब अलग-अलग टीमों ने एक साथ कई प्रतिष्ठानों में प्रवेश किया, तब वास्तविकता सामने आई। कुछ समय तक स्थानीय लोग स्थिति को समझ ही नहीं पाए।
कार्रवाई की गोपनीयता और एक साथ कई स्थानों पर दबिश ने संकेत दिया है कि विभाग के पास पहले से ठोस इनपुट मौजूद थे। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डेटा से क्या-क्या राज खुलते हैं।


क्या सलाखों के पीछे जाएंगे जिम्मेदार?


जनता के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या सचमुच दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा? यदि जांच निष्पक्ष और निर्भीक तरीके से आगे बढ़ती है, तो खनन माफिया के साथ-साथ संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर भी शिकंजा कस सकता है।
ओबरा की यह कार्रवाई केवल एक छापा नहीं, बल्कि उस पूरे खनन तंत्र की परीक्षा है, जिस पर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। अब देखना यह है कि ‘शादी’ के स्टिकर वाली गाड़ियों से शुरू हुआ यह ऑपरेशन क्या सचमुच काले साम्राज्य की जड़ें हिला पाएगा, या फिर फाइलों में दबकर रह जाएगा।
फिलहाल, सोनभद्र की सियासी और प्रशासनिक गलियारों में सन्नाटा है — और आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कानून का यह प्रहार कितना घातक साबित होता है।

spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

लेटेस्ट पोस्ट

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का सोनभद्र दौरा: विकास योजनाओं की समीक्षा और लाभार्थियों को सामग्री वितरण

सोनभद्र, 26 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोनभद्र जिले में विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति...

ख़बरें यह भी

Enable Notifications OK No thanks