सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) — जनपद सोनभद्र के बसुहारी ग्राम में 12 जुलाई को प्रस्तावित पम्प्ड स्टोरेज परियोजना (PSP) से प्रभावित आदिवासी एवं स्थानीय ग्रामीणों के साथ एक महत्वपूर्ण जनचौपाल एवं जनसंवाद का आयोजन किया गया। अमन सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण, विस्थापन, पर्यावरणीय क्षति और आजीविका के संकट जैसी गंभीर समस्याओं को खुलकर रखा, जबकि अपना दल (एस) पार्टी के नेताओं ने उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का भरोसा दिलाया।

कार्यक्रम का आयोजन और उपस्थिति
बसुहारी गांव में आयोजित इस जनसंवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं अपना दल (एस) विधि मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट अभिषेक चौबे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ अपना दल (एस) सोनभद्र के जिलाध्यक्ष अंजनी पटेल, प्रवीण त्रिपाठी, लक्ष्मण गोंड़, राकेश पटेल, नंदु पटेल, हरिप्रसाद धांगर, आलोक पांडेय, अखिलेश पटेल, राम कृष्ण गुप्ता, सुनेश पासवान सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीण मौजूद थे।
यह जनचौपाल उन आदिवासी और स्थानीय परिवारों के लिए विशेष महत्व रखता है, जिनकी जीवनयात्रा प्रस्तावित पम्प्ड स्टोरेज परियोजना से सीधे प्रभावित होने वाली है। सोनभद्र क्षेत्र की भौगोलिक संरचना और वन सम्पदा को देखते हुए ऐसी परियोजनाएं अक्सर विवादास्पद रही हैं।

ग्रामीणों की प्रमुख चिंताएं
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा। मुख्य मुद्दे निम्नलिखित रहे:
भूमि अधिग्रहण और विस्थापन: कई परिवारों को अपनी पैतृक भूमि से विस्थापित होने का खतरा है। उचित मुआवजा, पुनर्वास और आजीविका के वैकल्पिक स्रोतों की मांग की गई।
वनाधिकार: वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों (Forest Rights Act के तहत) पर संकट।
पर्यावरणीय प्रभाव: परियोजना से जल स्रोतों, जैव विविधता और कृषि योग्य भूमि पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभाव।
प्रशासनिक और कंपनी की कार्यप्रणाली: पारदर्शिता की कमी, बिना पर्याप्त परामर्श के आगे बढ़ने की शिकायतें।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन “लोगों की कीमत पर विकास” स्वीकार नहीं करेंगे।
नेताओं के आश्वासन और संदेश

अधिवक्ता अभिषेक चौबे ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि यदि कंपनी या प्रशासन द्वारा किसी भी आदिवासी या स्थानीय नागरिक के साथ अन्याय होता है, तो वे उनके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा:
“विकास आवश्यक है, लेकिन वह संविधान, कानून और स्थानीय लोगों के अधिकारों की कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकता।”
उन्होंने ग्रामीणों से संगठित एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया और विश्वास दिलाया कि इस न्यायपूर्ण लड़ाई में वे हर कदम पर उनके साथ खड़े रहेंगे।
अपना दल (एस) सोनभद्र के जिलाध्यक्ष अंजनी पटेल ने लोगों को संगठित होने का आह्वान करते हुए कहा:
“जल, जंगल, जमीन और जनाधिकार की रक्षा हमारा संवैधानिक दायित्व है। विकास तभी सार्थक है जब उसमें स्थानीय लोगों का सम्मान, सहभागिता और न्याय सुनिश्चित हो।”
विश्लेषण
यह जनसंवाद सोनभद्र जैसे आदिवासी-बहुल क्षेत्र में विकास परियोजनाओं के प्रति बढ़ती जागरूकता और सतर्कता का प्रतीक है। भारत में पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाएं ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन्हें अक्सर पर्यावरणीय मंजूरी, सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (SIA) और स्थानीय समुदायों से पर्याप्त परामर्श की कमी का सामना करना पड़ता है।
बसुहारी का यह कार्यक्रम उन कई आंदोलनों की कड़ी में शामिल है, जहां आदिवासी समुदाय “जल-जंगल-जमीन” के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित हो रहे हैं। अभिषेक चौबे जैसे कानूनी विशेषज्ञों का सक्रिय सहयोग स्थानीय लोगों को सशक्त बनाने वाला कदम है, जो भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में कानूनी लड़ाई को मजबूत बनाएगा।

दूसरी ओर, प्रशासन और परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों को पारदर्शिता, उचित मुआवजा, पुनर्वास पैकेज और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने की जरूरत है, ताकि विकास और स्थानीय अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे।
समापन
कार्यक्रम के अंत में बसुहारी के सभी ग्रामीणों, खासकर आदिवासी भाई-बहनों के सक्रिय सहभागिता के लिए आयोजकों ने हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया।
यह जनसंवाद केवल एक बैठक नहीं, बल्कि प्रभावित समुदाय की आवाज को मुख्यधारा में लाने का प्रयास है। आगे की स्थिति पर नजर बनी रहेगी, क्योंकि सोनभद्र में विकास और अधिकारों के बीच का संतुलन न केवल स्थानीय, बल्कि पूरे राज्य के लिए मिसाल बन सकता है।



