नगवा ब्लॉक से सामने आया मामला, कई शिक्षक निलंबित और वेतन अवरुद्ध
जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। ताजा मामला नगवा ब्लॉक से सामने आया है, जहां स्वीकृत अवकाश पर रहे शिक्षकों के खिलाफ अनुपस्थिति के आधार पर निलंबन और वेतन संबंधी कार्रवाई किए जाने से विभागीय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगवा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सूअरसोत में कार्यरत सहायक अध्यापक विमलेश कुमार और रवि सिंह पटेल को 27 अक्टूबर को विद्यालय में अनुपस्थित रहने के आधार पर निलंबित कर दिया गया। जबकि दोनों शिक्षकों का उक्त तिथि का अवकाश पूर्व में स्वीकृत था।


इसी विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका अंजली कुमारी 27 अक्टूबर 2025 से एक माह के मातृत्व अवकाश पर थीं, बावजूद इसके उन्हें भी विद्यालय में अनुपस्थिति के आधार पर दंडित किया गया।



मामला यहीं तक सीमित नहीं है। प्राथमिक विद्यालय सियरिया में कार्यरत सहायक अध्यापक दिनेश वर्मा को भी 27 अक्टूबर को अनुपस्थित दर्शाते हुए निलंबित कर दिया गया, जबकि वे भी उस दिन अवकाश पर थे। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक विद्यालय सूअरसोत में तैनात सहायक अध्यापक प्रवीण कुमार एवं अनुदेशक राम नरेश, जो स्वीकृत अवकाश पर थे, को भी अनुपस्थिति के आधार पर निलंबित करते हुए उनका वेतन अवरुद्ध कर दिया गया।


ऑनलाइन प्रक्रिया पर भी सवाल
वर्तमान में बेसिक शिक्षा विभाग में अवकाश आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है और स्वीकृति भी ऑनलाइन ही दी जाती है। ऐसे में यदि संबंधित शिक्षकों का अवकाश विभागीय पोर्टल पर स्वीकृत था, तो उन्हें अनुपस्थित मानकर दंडित किए जाने पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
विभाग में ‘कारखास’ संस्कृति का आरोप
सूत्रों का दावा है कि विभागीय कार्यालयों में कुछ कर्मचारी अधिकारियों से सांठ-गांठ कर कार्यालयों से संबद्ध रहते हैं और अपने मूल तैनाती स्थल पर नहीं जाते। आरोप है कि ऐसे कथित ‘कारखास’ कर्मचारी ही विभागीय निर्णयों को प्रभावित करते हैं और विरोध करने वाले कर्मचारियों को प्रताड़ित करने के लिए निलंबन जैसी कार्रवाई कराई जाती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन शिक्षकों के बीच असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।

अखिर जिम्मेदारी किसकी?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब संबंधित शिक्षकों का अवकाश विधिवत स्वीकृत था, तो अनुपस्थिति के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई किस आधार पर की गई? यदि प्रक्रिया में त्रुटि हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में बाद में निलंबन आदेश वापस भी लिए गए, लेकिन अभी तक सभी शिक्षकों को राहत नहीं मिली है। यह भी चर्चा है कि कुछ शिक्षकों को राहत पाने के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास करने पड़े।
निष्पक्ष जांच की मांग
पूरा प्रकरण प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अब देखना यह है कि विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या संबंधित शिक्षकों को पूर्ण न्याय मिल पाता है या नहीं।



