विभागीय अधिकारियों ने जताई अनभिज्ञता, एक्सईएन ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही
सोनभद्र। सिंचाई विभाग के एक सरकारी कार्यालय के गैराज में ‘नॉट फॉर सेल’ अंकित सीमेंट की सैकड़ों बोरियां रखे होने का मामला सामने आया है। सरकारी परिसर में इतनी बड़ी मात्रा में ऐसे सीमेंट के रखे होने से इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, सीमेंट किसका है और उसे गैराज में किसके निर्देश पर रखा गया, इसकी आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।
मामले को लेकर जब विभागीय कर्मचारियों से जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि उन्हें इस सीमेंट के बारे में जानकारी नहीं है। उनके अनुसार, इस संबंध में जेई हेडक्वार्टर अथवा एई ही स्पष्ट जानकारी दे सकते हैं।

जेई हेडक्वार्टर से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि उक्त सीमेंट किसी अन्य विभाग के ठेकेदार द्वारा यहां रखवाया गया है और संभव है कि संबंधित ठेकेदार का कहीं कार्य चल रहा हो। जब उनसे सीमेंट की बोरियों पर लिखे ‘नॉट फॉर सेल’ के संबंध में पूछा गया और यह जानने का प्रयास किया गया कि इस सीमेंट को सरकारी गैराज में किस आधार पर रखा गया, तो उनका कहना था कि उन्होंने यह नहीं देखा है कि सीमेंट ‘नॉट फॉर सेल’ अंकित है।
जानकारों के अनुसार, ‘नॉट फॉर सेल’ अंकित निर्माण सामग्री सामान्य व्यावसायिक बिक्री के लिए नहीं होती। ऐसी सामग्री सरकारी कार्यों अथवा किसी विशेष परियोजना की आवश्यकता के लिए आपूर्ति की जा सकती है। ऐसे में यदि किसी निर्धारित कार्य के लिए मंगाई गई सामग्री को किसी दूसरे स्थान पर रखा या इस्तेमाल किया जा रहा है, तो उसके स्रोत, स्वामित्व और उपयोग की जांच आवश्यक हो जाती है।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यदि यह सीमेंट किसी विशेष निर्माण कार्य के लिए मंगाया गया था और उसकी पूरी मात्रा उसी कार्य में इस्तेमाल नहीं हुई, तो बची हुई सामग्री को अन्यत्र ले जाने या इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में संबंधित कार्य की सामग्री खपत और गुणवत्ता से जुड़े सवालों की भी जांच की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, वर्तमान में यह केवल जांच का विषय है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि सीमेंट का कहीं गलत इस्तेमाल हुआ है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब सिंचाई विभाग के एक्सईएन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस सीमेंट के संबंध में पहले कोई जानकारी नहीं थी और इसकी जानकारी अब मिली है। उन्होंने कहा कि वह मामले की जांच कराएंगे और यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ‘नॉट फॉर सेल’ अंकित सीमेंट की सैकड़ों बोरियां सिंचाई विभाग के सरकारी गैराज में किसकी अनुमति से और किस उद्देश्य से रखी गईं? सीमेंट किस कार्य के लिए खरीदा गया था, उसका वास्तविक स्वामी कौन है और उसे यहां रखने की अनुमति किसने दी—इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।



