सोनभद्र । रॉबर्टसगंज । विंध्यलीडर संवाददाता । 14 सितंबर हिंदी दिवस पखवाड़ा का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार पारसनाथ मिश्र के अशोक नगर स्थित आवास पर हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पारसनाथ मिश्र ने कहा कि-” हिन्दी भाषा का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना गया है।
वर्ष 1918 में गांधी जी ने हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारीप्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविन्ददास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिंह ने अथक प्रयास किए।
14 सितम्बर 1949 को हिन्दी के पुरोधा व्यौहार राजेन्द्र सिंह का 50-वां जन्मदिन था, जिन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया था, संविधान सभा के निर्णय के अनुसार 14 सितंबर को ही हिंदी दिवस मनाने का निश्चय किया गया। यह परंपरा आजादी के 80 वर्षों बाद भी जारी है।
संगोष्ठी में गीतकार जगदीश पंथी, ईश्वर बिरागी, इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी, समाजसेवी आलोक चतुर्वेदी, डॉ अनूप मिश्र अपना- अपना विचार व्यक्त किया संगोष्ठी का सफल संचालन हर्षवर्धन ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मा सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर गीतकार जगदीश पंथी की वाणी वंदना से हुआ। इस अवसर पर हिंदी साहित्य सेवी उपस्थित रहे।



