ऊषा वैष्णवी
नई दिल्ली । विंध्यलीडर संवाददाता । हिमाचल प्रदेश की अटल टनल भारत की सबसे महत्वपूर्ण पहाड़ी सड़क परियोजनाओं में से एक है। रोहतांग दर्रे के नीचे बनी यह सुरंग 9.02 किलोमीटर लंबी है और समुद्र तल से लगभग 10,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। इसे 2022 में World Book of Records द्वारा 10,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी हाईवे सुरंग के रूप में प्रमाणित किया गया था। इसलिए “दुनिया की सबसे ऊंची और लंबी राजमार्ग सुरंग” वाली बात को थोड़ा सही तरीके से समझना जरूरी है। आधिकारिक रिकॉर्ड विशेष रूप से 10,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर सबसे लंबी हाईवे सुरंग का है।
अटल टनल का निर्माण पीर पंजाल पर्वतमाला में रोहतांग दर्रे के नीचे किया गया है। इसे 3 अक्टूबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया था। सुरंग बनने से पहले भारी बर्फबारी के कारण लाहौल-स्पीति घाटी साल के लगभग छह महीने देश के बाकी हिस्सों से सड़क मार्ग से कट जाती थी। अटल टनल ने इस समस्या को काफी हद तक दूर करते हुए मनाली और लाहौल-स्पीति के बीच सालभर आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई।
इस सुरंग का रणनीतिक महत्व भी बहुत बड़ा है। यह मनाली–लेह मार्ग पर रोहतांग दर्रे को बायपास करती है और मनाली से लेह की सड़क दूरी को लगभग 46 किलोमीटर कम करती है। सरकारी जानकारी के अनुसार इससे यात्रा के समय में करीब 4 से 5 घंटे तक की बचत होती है। इसका फायदा स्थानीय लोगों, पर्यटकों के साथ-साथ भारतीय सेना और रणनीतिक सामान की आवाजाही को भी मिलता है।
दिलचस्प बात यह है कि इस सुरंग को बनाने का विचार नया नहीं था। रोहतांग के नीचे सुरंग बनाने का रणनीतिक निर्णय 3 जून 2000 को लिया गया था और 2002 में इसके लिए आधारशिला रखी गई। बाद में 24 दिसंबर 2019 को इसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में “अटल टनल” रखा गया। सीमा सड़क संगठन यानी BRO ने इसका निर्माण पूरा किया और 2020 में इसे देश को समर्पित किया गया।
दिलचस्प बात यह है कि इस सुरंग को बनाने का विचार नया नहीं था। रोहतांग के नीचे सुरंग बनाने का रणनीतिक निर्णय 3 जून 2000 को लिया गया था और 2002 में इसके लिए आधारशिला रखी गई। बाद में 24 दिसंबर 2019 को इसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री **अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में “अटल टनल” रखा गया। सीमा सड़क संगठन यानी BRO ने इसका निर्माण पूरा किया और 2020 में इसे देश को समर्पित किया गया।
एक और जरूरी सुधार यह है कि अटल टनल सीधे “लद्दाख को भारत से जोड़ती है” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है। इसका मुख्य सीधा संपर्क मनाली और लाहौल-स्पीति के बीच है। हालांकि यह मनाली–लेह मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के कारण लद्दाख तक जाने वाली रणनीतिक और सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करती हैं । इसलिए मूल दावा काफी हद तक सही है लेकिन शब्दों में थोड़ी अतिश्योक्ति है ।



