सोनभद्र ज़िले के बिल्ली मारकुंडी में डोलो स्टोन पत्थर का खनन क्षेत्र है जहां अभी कुछ माह पूर्व ही बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में हुए दर्दनाक हादसे में कई मजदूरों की जान चली गई थी। हादसे के बाद खान सुरक्षा निदेशालय ने इस क्षेत्र की खदानों में काम बंद कर दिया था।
विंध्यलीडर के हाथ लगे दस्तावेज के मुताबिक सात जनवरी दो हजार छब्बीस को इस क्षेत्र की पांच खदानों को डीजीएमएस (खनन सुरक्षा महानिदेशालय) ने फिर से काम करने के लिए सशर्त निर्देश जारी करते हुए कहा था कि खदानों में केवल सुधारात्मक और सुरक्षा संबंधी कार्य ही किए जाएंगे।
लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं—क्या इन आदेशों का पालन हो रहा है?
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों का आरोप है कि सुधार कार्य के नाम पर पट्टाधारक खुलेआम मनमानी कर रहे हैं। भारी मशीनें फिर से चल रही हैं, खनन गतिविधियाँ जारी हैं और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखा जा रहा है। जबकि डी जी एम एस द्वारा जारी किए गए आदेश में एक शर्त य़ह भी है कि खदान में केवल दो खुदाई के लिए दो मशीन तथा 04 टीपर से अधिक नहीं होनी चाहिये तथा एक शर्त य़ह भी है कि खदान की तलहटी में कोई कार्य नहीं होगा परंतु उक्त पांचों खदानों में धुंआधार इन शर्तों की धज्जियाँ उड़ाते हुए भारी पैमाने पर खनन कार्य को अंजाम दिया जा रहा है और इस तरह के कार्यो पर निगरानी रखने वाले जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी आँख मूंद रखी हैं।कुछ दिनों पहले हुए खनन हादसे के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि खनन क्षेत्र में फिर हलचल तेज हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल य़ह उठता है कि
क्या डीजीएमएस के आदेशों की अनदेखी हो रही है?
क्या प्रशासन केवल दर्शक बनकर सब कुछ देख रहा है?
आखिर हादसे से कोई सबक क्यों नहीं लिया गया?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह नियमों को नजरअंदाज किया गया तो भविष्य में फिर कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों में आक्रोश है और वे निष्पक्ष जांच तथा सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हादसे के बाद जारी सख्त निर्देशों के बावजूद यदि खनन गतिविधियाँ दोबारा शुरू हुई हैं, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और खनन विभाग इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या इसी तरह डीजीएमएस (खनन सुरक्षा महानिदेशालय) द्वारा जारी निर्देश की अवहेलना कर खनन जारी रहेगा ? क्या मजदूरों की जान जोखिम में डाल इसी तरह खनन कार्य चलेगा या इस तरह के कार्यो पर अंकुश लगेगा।



