— सोनभद्र। मिशन-2027 की शुरू हुई कवायद में सत्ताधारी दल में टिकटार्थियों की लंबी लाइन देखी जा रही है।किसको टिकट मिलेगा ?यह अभी तय नहीं है लेकिन एक दर्जन से अधिक नेता चुनावी प्रचार में अभी से डट गए हैं। उत्तर प्रदेश की सत्ता में तीसरी बार काबिज होने को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में बेचैनी देखी जा रही है। उधर समाजवादी पार्टी के पीडीए फार्मूले ने उनकी उलझन को और बढ़ा रखा है।टिकट पक्का रहे इसके लिए भाजपा के आधा दर्जन से अधिक कद्दावर नेता टिकट की चाह में अपनी राह बदलने तक को तैयार बैठे हैं। खबर है कि वर्षों से टिकट की बाट जोह रहे ये नेता चुनाव प्रचार तो भाजपा से कर रहे हैं लेकिन दूसरे दलों में भी अपना ठिकाना तलाश रहे हैं।

जिले की कुल 04 विधानसभा सीटों में सबसे अधिक दावेदार पिछले 10 वर्षों से सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी में ही देखे जा रहे हैं। मजबूत दावेदारी की अगर बात की जाए तो सदर विधानसभा से दो बार के विधायक विधायक भूपेश चौबे करीब-करीब अपना टिकट पक्का ही मान रहे हैं जबकि इस सीट पर भाजपा से कई अन्य दिग्गज नेता अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे है और उनका तर्क है कि दो बार से लगातार विधायक रहने के कारण जनता की वर्तमान विधायक से नाराजगी पार्टी के लिए भारी पड़ सकती है, ऐसे में यदि शीर्ष नेतृत्व टिकट बदलने पर विचार करता है तो हमारी किस्मत भी चमक सकती है
उधर दूसरी तरफ कुछ लोग दूसरे दलों में भी अपना जुगाड़ तलाश रहे है क्योंकि यदि सत्ताधारी दल में टिकट नहीं मिलता तो किसी अन्य दल से टिकट लेकर चुनाव लड़ने की जुगत पक्की रहे यही वजह है कि अभी पुरे पत्ते नहीं खुले है। इसी तरह से जिले की एक अन्य सीट ओबरा विधानसभा है जहाँ से वर्तमान में संजीव गोड़ जी विधायक हैं जो वर्तमान सरकार में राज्य मंत्री भी है इसलिए वह भी अपने सीट पर अपना टिकट पक्का मान रहे है। फिलहाल इस सीट पर पार्टी किसका टिकट तय करेगी यह अभी भविष्य के गर्भ में है लेकिन राजनीति के जानकारों का कहना है की यह सीट भी अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है और इस जिले की दुद्धि सीट भी अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है और वर्तमान में यह सीट जीतना भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की बात है क्योंकि यहाँ से कई दशक बाद भजपा के टिकट पर जीत हासिल करने के बाद रामदुलारे गोंड़ के जेल जाने के बाद से ही यह विधानसभा खाली है इसलिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा मौजूदा मंत्री को इस सीट पर चुनाव लड़ने के लिए भेजा जा सकता है, इसलिए ओबरा विधानसभा सीट पर भी कई दावेदार मैदान में कूद पड़े है।

इतना तो तय है कि भाजपा प्रदेश की सत्ता तीसरी बार पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देगी और इसमें उसे जो भी करना पड़े वह सब कुछ करने को तैयार बैठी है इसीलिए पार्टी का शीर्ष नेतृत्व एंटी एंकम्बेसी कम करने के लिए बड़ी संख्या में वर्तमान विधायकों का टिकट काट कर नए चेहरों के साथ मैदान में आना चाहता है, शीर्ष नेतृत्व क़ी इसी कदम को देखते हुए विधायकी के लिए भाजपा के कई कद्दावरों को राह बदलने के लिए मजबूर कर रखा है।वह दूसरे दलों से भी संपर्क कर येन-केन-प्रकारेंण टिकट पाना चाह रहे हैं। चुनावी रणभेरी में बिगुल भले ही अभी न फुंका हो लेकिन भावी विधायकों का चुनावी अभियान तेज हो गया है।कोई जनसंपर्क में है तो कोई होर्डिंग वार में लगा हुआ है। तय पार्टी को करना है कि किससे गठबंधन कर कौन सी सीट दी जाए और टिकट किसे दिया जाए? किसका काटा जाए! लेकिन उसके पहले बड़ी सेंधमारी की तैयारी में अगर कोई है तो भारतीय जनता पार्टी के नेता ही हैं।





