राजेन्द्र द्विवेदी
सोनभद्र। जनपद के राबर्ट्सगंज तहसील के भवानी ग्राम के निवासी वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अर्जुन दास केशरी राष्ट्रपति व राज्यपाल पुरस्कार सहित उत्तर प्रदेश संगीत अकादमी कला पुरस्कार से नवाजे जा चुके साहित्य साधक डा. अर्जुन दास केसरी का आज मध्यान्ह हृदयाघात से निधन हो गया। उल्लेखनीय है कि डा. केसरी ने अपना सम्पूर्ण जीवन साहित्य साधना और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया था। उनके निधन की खबर से पूर्वांचल के साहित्यिक वरन् राजनैतिक जगत में भी में शोक की लहर दौड़ गई।

डॉ. केशरी ने जीवन पर्यन्त जनजातियों के जीवन कला और संस्कृति पर कार्य किया है। जनजातियों पर उनकी कुल 60 से अधिक पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। डॉ.केशरी की जनजातियों की लोकगाथा, लोक कथा, लोक जीवन, लोक संस्कृति और पुरातत्व पर काफी पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उनका सम्पूर्ण कार्य ही जनजातीय जीवन पर ही के्द्रिरत रहा।
शिक्षक होने के साथ ही साथ वह साहित्य साधक और लोकवार्ता शोध संस्थान के निदेशक भी थे। डा. केसरी ने आदिवासी समाज की बोली, भाषा, लोकगीतों और लोकपरंपराओं के संरक्षण एवं संकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लोरिकायन, डोमकच और नटुआ जैसे लोकगीतों को संकलित कर लोकसंस्कृति की समृद्ध विरासत को सहेजने का कार्य किया। पचास से अधिक पुस्तकों के प्रणेता 90 वर्षीय डा. केसरी अपने सरल स्वभाव और मानवीय संवेदनाओं के लिए भी जाने जाते रहे हैं ।

उल्लेखनीय है कि उनकी विन्ध्य क्षेत्र का सांस्कृतिक वैभय और लोरिकायन पुस्तक पर पांच छात्रों ने पीएचडी भी की है। वहीं उनकी पुस्तक विजयमल लोकगाथा पर एक छात्र नेशनल सीनियर फेलोशिप भी कर चुका है। जबकि बड़ौदा युनिवर्सिटी का एक छात्र उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर पीएचडी की है। बता दें कि डा. अर्जुन दास केशरी ने प्राथमिक शिक्षा सोनभद्र के चतरा ब्लाक के कोरियांव स्थित अपनी पैतृक स्थल से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। टीडी कालेज जौनपुर से 1964 एलटी किया है। संस्कृत और हिन्दी में गोरखपुर युनिवर्सिटी से एमए किया। काशी विद्यापीठ से पीएचडी और साहित्य महोपाध्याय की उपाधि हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयागराज से ली है। इतना ही नहीं डॉ केशरी को न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि मध्य प्रदेश बिहार सहित कई प्रान्तों से शिक्षा और साहित्य सेवा के लिए सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है उन्हें अब तक 16 राष्ट्रीय स्तर के मिल चुके हैं। वर्ष 1996 में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। वे 32 साल तक आदर्श इंटरमीडिएट कालेज में प्रधानाचार्य के पद पर रहे।

उनके निधन पर उनके आवास पर जा कर पूर्व सांसद रामशकल , भाजपा के जिला अध्यक्ष नन्दलाल सहित सैकड़ों सामाजिक , साहित्यक , पत्रकार ने जा कर अपनी संवेदना व्यक्त किया वही शहीद स्थल करारी के निदेशक प्रद्युम्न त्रिपाठी की अध्यक्षता में शोक प्रस्ताव पारित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उन्होंने कहा कि डा. केसरी का निधन साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है। लोकसंस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।










