सोनभद्र में ओवरलोडिंग से हर साल 182 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का दावा, ट्रक ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने डीएम से जांच की मांग
सोनभद्र ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने जिले में गिट्टी-बालू के परिवहन में कथित ओवरलोडिंग से होने वाली भारी राजस्व क्षति का मुद्दा उठाते हुए ---

ब्रजेश पाठक , उप संपादक
सोनभद्र। सोनभद्र ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने जिले में गिट्टी-बालू के परिवहन में कथित ओवरलोडिंग से होने वाली भारी राजस्व क्षति का मुद्दा उठाते हुए जिलाधिकारी को पत्र सौंपा है। एसोसिएशन ने मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने और परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की है।


आज भेजे गए पत्र में एसोसिएशन ने कहा है कि जनपद में करीब 1,000 वाहन प्रतिदिन गिट्टी-बालू के परिवहन में लगे हैं। एसोसिएशन के अनुसार, निर्धारित परमिट मात्रा से अधिक खनिज परिवहन किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। पत्र में विशेष रूप से दावा किया गया है कि 20 घन मीटर के परमिट के मुकाबले करीब 30 घन मीटर तक खनिज परिवहन किए जाने की स्थिति सामने आ रही है।
एसोसिएशन ने अनुमान के आधार पर बताया कि यदि प्रत्येक वाहन में औसतन 10 घन मीटर अतिरिक्त खनिज का परिवहन हो और खनिज का न्यूनतम मूल्य ₹500 प्रति घन मीटर माना जाए, तो एक वाहन पर करीब ₹5,000 के अतिरिक्त खनिज का परिवहन होता है। 1,000 वाहनों के हिसाब से यह राशि करीब ₹50 लाख प्रतिदिन और 30 दिनों में करीब ₹15 करोड़ बैठती है। पत्र में इसी अनुमान के आधार पर सालाना लगभग ₹182 करोड़ के अतिरिक्त खनिज मूल्य का उल्लेख किया गया है। हालांकि एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक सरकारी राजस्व क्षति का निर्धारण खनिज मूल्य, रॉयल्टी, जुर्माना और अन्य वैधानिक देयताओं के आधार पर संबंधित विभाग द्वारा किया जाना चाहिए।

एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
निर्धारित परमिट से अधिक लोडिंग पर लगाई जाए लगाम और लोडिंग प्वाइंट की तय की जाए जवाबदेही ।
ओवरलोड वाहन मिलने पर केवल चालक या वाहन मालिक पर कार्रवाई न हो, बल्कि यह भी जांच हो कि अतिरिक्त खनिज किस लोडिंग प्वाइंट से और किस स्तर पर लोड किया गया।
खनिज जांच चौकियों/चेकिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए तथा जांच चौकी पार करने वाले संदिग्ध ओवरलोड वाहनों की जांच की जाए।
E/Transit Pass, E/MM-11, फार्म-C, परमिट में दर्ज मात्रा, वजन पर्ची, लोडिंग प्वाइंट रिकॉर्ड, जांच चौकी रिकॉर्ड और CCTV/डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए।
जांच में अधिकारियों, कर्मचारियों या लोडिंग प्वाइंट संचालकों की लापरवाही अथवा नियम उल्लंघन सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ओवरलोडिंग से होने वाली संभावित राजस्व क्षति का विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक आकलन कराया जाए।
वैध परमिट के अनुसार परिवहन करने वाले वाहन स्वामियों को ओवरलोड वाहनों से होने वाली असमान प्रतिस्पर्धा और आर्थिक नुकसान से बचाया जाए।

पत्र में यह भी कहा गया है कि सोनभद्र चार राज्यों से घिरा है और यहां के खनन क्षेत्र से बड़ी मात्रा में खनिज सीमावर्ती प्रदेशों में जाता है। एसोसिएशन ने पूर्व में 6 नंबर बैरियर के नाम से संचालित जांच चौकी जैसी व्यवस्था फिर प्रभावी करने तथा खनन चेक पोस्ट को सुचारू रूप से लागू करने की मांग की है।
एसोसिएशन ने जिलाधिकारी से लोडिंग प्वाइंट से लेकर खनिज जांच चौकी और गंतव्य तक वाहनों के रिकॉर्ड का मिलान कराकर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि इससे सरकारी राजस्व की संभावित क्षति को रोकने के साथ-साथ वैध रूप से परिवहन करने वाले वाहन स्वामियों को भी राहत मिल सकेगी।



