नई दिल्ली । संवाद सूत्र । अगर आप भी हर महीने अपने पत्नी के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करते हैं तो आपको यह नियम जरूर जान लेना चाहिए। आपने अक्सर देखा होगा कि कई लोग इनकम टैक्स बचाने के चक्कर में अपने पत्नी के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं या फिर अपने पत्नी को बिजनेस या किसी और काम के लिए पैसे देते हैं। तो यह जो लेनदेन हो रहा है वह इनकम टैक्स के दायरे में आता है? क्या आप यहां पर टैक्स बचा सकते हैं आईए जानते हैं कि आप अपनी पत्नी के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करके कब और किन-किन परिस्थितियों में पैसे को बचा सकते हैं।
Income Tax Act के Section 60 से 64 तक Clubbing Of Income का प्रावधान है अगर किसी और को मिल रही इनकम पर आपका नाम से टैक्स कटता है तो उसे एक लिविंग ऑफ इनकम कहते हैं। यह नियम इंडिविजुअल टैक्स पेयर्स पर लागू होता है अगर सीधे शब्दों में समझा जाए तो किन्हीं परिस्थितियों में आप अपनी पत्नी को पैसे देते हैं और उन्हें पैसे पर ब्याज से या डिविडेंड से कमाई होती है तो वह इनकम आपकी इनकम में जोड़ी जाएगी।
अगर आप अपने पत्नी को ₹200000 देते हैं और वह पैसे को फिक्स डिपॉजिट में लगा दिया है या फिर उन्हें म्युचुअल फंड या स्टॉक मार्केट में निवेश कर दिया है। तो ऐसे में इन निवेश माध्यम से जो कमाई होगा वह सभी कमाई पर इनकम टैक्स लगेगा।
इस प्रकार अगर आपने अपना कोई घर किराए पर दिया है लेकिन किराया अपनी पत्नी के अकाउंट में ले रहे हैं तब भी आपको रेंटल इनकम आपका नाम से जोड़ा जाएगा क्योंकि यहां क्षेत्र 60 का ट्रांसफर आफ इनकम विदाउट ट्रांसफर ऑफ एसिस्ट (transfer of income without transfer of assist) नियम लागू होता है।