सोनभद्र । राबर्ट्सगंज में अवैध रूप से चल रहा रामा अस्पताल एक बार फिर उस वक्त चर्चा में आ गया जब एक मृतक महिला का शव लेकर परिजन अस्पताल के बाहर हंगामा करने लगे। मामला बढ़ता देख पुलिस भी मौके पर पहुँच गयी। इस मामले में एसीएमओ व नोडल गुलाब शंकर ने कहा कि उक्त अस्पताल बिना लाइसेंस के सांचालित किया जा रहा था, उन्होंने उक्त हॉस्पिटल संचालक के विरुद्ध FIR दर्ज कराने की बात कही है।

परिजनों के मुताबिक कंचन मौर्या (29 वर्ष ) पत्नी मिथिलेश कुमार मौर्या निवासी रजधन, चोपन को प्रसव दर्द हुआ तो घर के लोग उसे लोढ़ी स्थित मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए , जहाँ 12 घण्टे रखने के बाद मेडिकल कालेज के लोग यह कहते क़ी इनकी नार्मल डिलेवरी नहीं हो पा रही है,बिना ऑपरेशन के बच्चा पैदा नहीं होगा इसलिए इसे किसी दूसरे बड़े अस्पताल लें जाइये और लोढ़ी हॉस्पिटल के स्टॉफ मेरे मरीज को वाराणसी रेफर करने की बात करने लगे। इसके बाद वहाँ एक शख्स ने परिजनों को रामा अस्पताल ले चलने की बात कहकर वहां भर्ती करा दिया, जहां दूसरे दिन कंचन का ऑपरेशन कर बच्चे को जन्म दिया गया। परिजनो के मुताबिक ऑपरेशन के बाद से जच्चा-बच्चा की हालत अच्छी नहीं रही जिसे देखते हुए नवजात को राबर्ट्सगंज के एक निजी चाइल्ड केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन कंचन की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी बावजूद इसके रामा हॉस्पिटल के डॉक्टर लगातार ठीक होने का आश्वासन देते रहे । दो दिन बाद जब परिजनों को यह आभास हुआ कि कंचन की हालत ज्यादा गंभीर है तो उन्होंने उसे वहाँ से हटाकर वाराणसी में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई ।

परिजनों का आरोप है कि कंचन की हालत बिगाड़ने में रामा हॉस्पिटल का हाथ है । रामा हॉस्पिटल यदि समय रहते कंचन को रेफर कर दिया होता तो आज जच्चा-बच्चा दोनों जिंदा रहते । इसी नाराजगी के चलते गुरुवार को परिजन शव लेकर वाराणसी से रामा हॉस्पिटल न्यू कॉलोनी पहुंचे और हंगामा करने लगे। हंगामा की खबर जैसे ही पुलिस को हुई दलबल के साथ पुलिस बल मौके पर पहुंच गए और मामले को सलटाने में जुट गए । मामला बढ़ता देख डिप्टी सीएमओ व नोडल गुलाब शंकर भी मौके पर पहुंच गए । नोडल ने बताया कि रामा हॉस्पिटल पूरी तरह से अवैध है, इसका पूर्व में बना लाइसेंस रद्द कर दिया गया है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है । रामा हॉस्पिटल में प्रसव कराया जाना गैरकानूनी है जिसके तहत उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी ।
खैर यह सब जो भी आगे होगा तो क्या इससे जो बच्चा अपने जन्म के बाद ही बिना मां के हो गया उसके जीवन में आने वाली कठिनाई को क्या रोका जा सकता है, आखिर इन सवालों का जबाब कौन देगा कि जब कंचन को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया तो आखिर वहाँ से रेफर की बात क्यों कही गयी। क्या अब मेडिकल कॉलेज प्रसव से कराह रही महिला मरीजों को भी रेफर कर रहा है ? क्या सोनभद्र में बना मेडिकल कालेज सुरक्षित डिलेवरी भी कराने में सक्षम नहीं है ? या फिर मेडिकल कालेज के स्टॉफ किसी गैंग से मिलकर मरीजों की डिलेवरी बाहर के निजी अस्पतालो को कर रहे है ? इन सवालों के भी जबाब ढूंढने होंगे कि एक सामान्य सी डिलेवरी केस के लिए आयी कंचन मेडिकल कालेज से उक्त निजी अस्पताल तक कैसे और क्यूँ पहुंची जहाँ उसकी मौत हो गई ?

वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी बड़ा है कि रामा हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द होने के बावजूद भी वह अस्पताल कैसे संचालित हो रहा था ? इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को पहले क्यों नहीं हुई ?आखिर स्वास्थ्य विभाग हर बार मौत के बाद ही क्यों जागता है ?
लोगों का कहना है कि यह सब मिली जुली व्यवस्था है। स्वास्थ्य विभाग को सब पता रहता है लेकिन कार्यवाही तब करता है जब कोई घटना घट जाती है । ऐसे में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में है । अभी भी लोगों के सामने वही सवाल खड़ा है कि आखिर सोनभद्र में कितने अवैध अस्पताल संचालित किये जा रहे हैं इसकी विज्ञप्ति जारी कर लोगों को जागरूक किया जाये जिससे कि लोग जान सकें कि कौन हॉस्पिटल अवैध है जहाँ अपने मरीजों को ले जाने से उनके जान जाने तक का खतरा है ।

कुल मिलाकर एक बार फिर एक बच्चा सिस्टम की लापरवाही के चलते अनाथ हो गया और एक पूरा परिवार बिखर कर गया । आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है? मजे की बात यह है कि हर बार स्वास्थ्य विभाग अस्पताल पर कार्यवाही तो कर देता है मगर इन अवैध अस्पतालो के संचालन के लिए जिम्मेदार नोडल अफसर पर कभी कार्रवाई नहीं होती । लोगों की मांग है कि नोडल सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, तभी व्यवस्था बदलेगी।










