Wednesday, September 22, 2021
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शिक्षा का मंदिर बनते राजनीति के अखाड़े

गाँव में बदले निजाम के बाद विद्यालय परिसर बन रहे राजनीति के अखाड़े,ग्राम शिक्षा समिति व अध्यापकों के बीच जंग से बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ने की सम्भावना

सोनभद्र । चतरा विकास खंड का बिरधी गांव दो दिनों से चर्चा में हैं। बिरधी गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात एक शिक्षिका के वायरल वीडियो ने शिक्षा विभाग में हड़कम्प मचा दिया है । वायरल वीडियो के मुताबिक शिक्षिका स्कूल देर से पहुंची तो गांव के ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष ने देर से आने का कारण पूछा तो देखते ही देखते मामला तल्ख हो गया । मामला इस कदर बढ़ गया कि शिक्षिका ने डायल 112 नम्बर पर फोन कर शिकायत कर दी । इसमें सबसे बड़ी बात यह रही कि इन सभी घटनाक्रम का वीडियो बनता रहा और बाद में उसे वायरल भी कर दिया गया ।
घटना सोमवार की बताई जा रही है । घटना के दूसरे दिन जब पत्रकारों की एक टीम पड़ताल करने प्राथमिक स्कूल बिरधी पहुंची तो जानकारी के बाद मौके पर प्रधान व ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण स्कूल पर जा धमके ।

प्रधान का कहना है कि महिला शिक्षिका के रहते स्कूल का माहौल नहीं सुधर सकता ।
इस पूरे मामले में प्रधान ने कहा कि उक्त शिक्षिका की कई बार शिकायत मिल चुकी है । लेकिन उनमें सुधार नहीं हो रहा । इसलिए उनकी मांग है कि यहां विवाद को देखते हुए शिक्षिका को यहां से हटाते हुए कड़ी कार्यवाही की जाय ।

वहीं ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष का कहना है कि शिक्षिका अक्सर देर से आती हैं । उस दिन भी वे देर से आईं तो उनके पूछते ही भड़क गई और फंसाने की धमकी देते हुए पुलिस में शिकायत कर दी । समिति के अध्यक्ष राजेंद्र का कहना है कि वे अपने बचाव में वीडियो को बनाया था जिसे बाद में वायरल किया ।

इस पूरे घटनाक्रम के दिन मौके पर मौजूद उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य भी अपने ही शिक्षिका को दोषी ठहराने में लगे हुए हैं । उनका कहना है कि शिक्षिका कश्यप अक्सर लेट आती हैं और वे इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से भी कई बार कर चुके हैं।

इस पूरे मामले पर प्राथमिक स्कूल के शिक्षिका का कहना है कि उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है । अक्सर स्कूल का वीडियो बना बनाकर धमकी दी जाती है । घटना वाले दिन वे लेट जरूर आयी थी लेकिन उनकी समस्या जाने बगैर ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष उनसे पूछताछ करने लगे और चोरी से उनका वीडियो बना रहे थे। जब वे वीडियो बनाने के लिए मना करने लगी तो वे वायरल करने की धमकी देने लगे । जिसके बाद कुछ सूझता न दिखकर उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस को की । शिक्षिका कश्यप ने बताया कि बाद में एबीएसए भी स्कूल पर आये थे और सारा मामला रफादफा करा दिया था लेकिन रात तक वीडियो सबके पास वायरल कर दिया गया ।

वहीं बीएसए ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है । बीएसए ने कहा कि जांच के बाद कड़ी कार्यवाही होगी ।

बहरहाल इस पूरे मामले में यह तो साफ हो गया कि वर्तमान में यह विद्यालय राजनीति का अखाड़ा बन चुका है । जिस तरह से एक छोटे से मुद्दे को लेकर राजनीतिकरण व गोलबंदी हो रही है उससे बच्चों के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा यह सोचने वाला कोई नहीं । जिस मामले को बैठकर सुलझाया जा सकता था वह सड़क पर आ चुका है । पूरे प्रकरण पर यदि गम्भीरता से विचार किया जाय तो एक बात तो स्पष्ट है कि उक्त महिला अध्यापिका उस विद्यालय पर नई नहीं है यदि उनका आचरण यदि खराब रहता तो यह बात तो पहले होनी चाहिए थी।उनके तैनाती के इतने दिनों बाद यह कहना कि उनका ब्यवहार ठीक नहीं है विश्वास के लायक नहीं है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि  अब यह बात क्यूँ उठ रही है तो यह बात साफ तौर पर समझी जा सकती है कि गाँवो में निजाम बदला है । अब नए निजाम को लगता है कि सब कुछ उनके अनुसार चले।परन्तु उन्हें यह बात समझनी होगी कि जो सरकारी व्यवस्थाएं उनके गांव में पहले से चल रही हैं उनमें उनके अनुसार परिवर्तन रातों रात नहीं हो सकता।यहाँ लड़ाई ईगो की लगती है।यदि प्रधान व शिक्षिका अपनी अपनी प्रतिष्ठा को लेकर लड़ते रहे तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा यह भी इन दोनों को समझना होगा।

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