Saturday, October 16, 2021
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नगरपालिका रॉबर्ट्सगंज का खसरा रजिस्टर गायब होने से नगर में जमीनी विवाद बढ़े,सरकारी कीमती जमीनों पर कब्जा करने की मची है होड़

रॉबर्ट्सगंज नगर में बढ़ते जमीनी विवाद की वजह गायब खसरा रजिस्टर है, लोगों की सोच है कि यदि सरकारी खाली जमीन पर एक बार उनका कब्जा हो गया तो जब भी नया सर्वे होगा उक्त जमीन पर उनका नाम चढ़ ही जायेगा।यही वजह है कि कीमती जमीनों पर कब्जे की मची है होड़।

सोनभद्र। युवा समाजसेवी गिरीश पाण्डेय का कहना है कि नजूल की खसरा खतौनी नगर पालिका से गायब होने से नगर में भूमि विवाद चरम पर है । जहाँ खाली जगह मिल रहा वहां पर लोग अतिक्रमण कर ले रहे है । चुकी दस्तावेज न होने से मालिकाना हक कोई नही दिखा पा रहा है । यही वजह है कि दबंग किस्म के व्यक्ति नगर में पैसे के दम पर कीमती जमीनों पर कब्जा कर रहे है । वही मौजूदा नगर पालिका अध्यक्ष के द्वारा भी अपने निजी होटल के सामने भी काफी अतिक्रमण किया जा चुका है । रजिस्टर गायब कर जमीनों की खरीद फरोख्त हो रहही है । अगर समय रहते प्रशासन गंभीरता से संज्ञान नही लेंगी तो एक दिन नगर में उम्भा जैसी घटना कभी भी हो सकती है ।यहां यह बात भी विचारणीय है कि खसरा रजिस्टर के गायब होने के बाद से पुराने खसरे के आधार पर नजूल की जमीनों की भी खरीद फरोख्त की जा रही है जबकि नियमानुसार नजूल की जमीन की रजिस्ट्री नही की जा सकती क्योंकि नजूल की जमीन की मालिक तो सरकार होती है।

आपको बताते चलें कि सोनभद्र नगर पालिका परिषद का खसरा रजिस्टर बीते 12 फरवरी 2018 को चोरी हो चुका है । गायब हुए रजिस्टर को लेकर नगर पालिका प्रशासन द्वारा विभागीय जाँच के साथ रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में 4 मार्च 2018 को एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी । लेकिन रजिस्टर किसने गायब करवाया , रजिस्टर कहां गया , इस तरह के कुछ अन्य सवालों को लेकर जिम्मेदार आज भी चुप्पी साधे हुए हैं । वही नगर पालिका क्षेत्र में जमीनों के कब्जे में हेरफेर दिखाकर कथित तौर पर कुछ रसूखदारों को लाभ पहुंचाने के लिए रजिस्टर गायब किए जाने की चर्चा आज भी नगर में बनी हुई है ।

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी प्रदीप गिरी का कहना है कि खसरा – खतौनी रजिस्टर गायब होने का प्रकरण उनके समय का नहीं है । उनकी यहां तैनाती से पहले रजिस्टर गायब हो चुका था । नगर पालिका की नजूल की जमीन का पता लगाने के लिए सर्वे कराया जा रहा है ।यहाँ यह बात भी विचारणीय है कि इसी सर्वे के चक्कर में कीमती सरकारी जमीनों पर कब्जे के लिए ही रसूखदारों में होड़ मची है।

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