Saturday, October 16, 2021
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किसान यूनियनों के भारत बंद के कारण देश के कई हिस्सों में, खासतौर से हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जनजीवन बाधित

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देश भर के 40 से अधिक किसान यूनियनों के मंच ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ (एसकेएम) ने किसान विरोध के 10 महीने पूरे होने और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के तीनों कानून पर मुहर लगाने के एक साल पूरा होने के मौके को चिह्नित करने के लिए सोमवार को बंद का आह्वान किया है।

लखनऊ /नई दिल्ली । केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ विभिन्न किसान यूनियनों के भारत बंद के कारण देश के कई हिस्सों में, खासतौर से हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जनजीवन सोमवार को बाधित हो गया। विभिन्न जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने राजमार्गों और प्रमुख सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। कई स्थानों पर वे रेल की पटरियों पर भी बैठ गए जिससे रेल यातायात प्रभावित हुआ।

तीनों कृषि कानून के विरोध में किसानों ने सोमवार को भारत बंद का एलान किया था । इसका असर उत्तर प्रदेश के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। बिजनौर, गोरखपुर, मथुरा समेत प्रदेश के कई जिलों में किसानों के प्रदर्शन का असर देखने को मिल रहा है ।

उल्लेखनीय हैं कि बंद में शामिल 40 से अधिक किसान यूनियनों के मंच ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ (एसकेएम) ने किसान विरोध के 10 महीने पूरे होने और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के तीनों कानून पर मुहर लगाने के एक साल पूरा होने के मौके को चिह्नित करने के लिए सोमवार को बंद का आह्वान किया है । बंद सुबह छह बजे से शाम चार बजे तक जारी रहेगा।

मथुरा में किसानों का प्रदर्शन
किसान आंदोलन को लेकर विभिन्न संगठनों द्वारा भारत बंद के आह्वान पर सोमवार को शहर से लेकर देहात में मिलाजुला असर देखने को मिला । शहर के हृदय स्थल होली गेट पर बंद का असर देखा गया, तो वहीं यमुना एक्सप्रेस-वे पर भी किसानों ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तीनों काले कानून को वापस लेने की मांग की गई। जनपद के यमुना एक्सप्रेस-वे और शहर के सभी चौराहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ।

भारतीय किसान यूनियन प्रदेश उपाध्यक्ष बुद्धा सिंह प्रधान ने बताया कि भारत बंद का असर जनपद में देखा जा रहा है । पिछले कई महीनों से किसान गाजीपुर बॉर्डर पर धरने पर बैठा हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार काले कानून को वापस नहीं ले रही है। सरकार हिटलर शाही नीति से किसानों को बर्बाद करने में तुली हुई है । तीनों काले कानून किसान के हित में नहीं हैं । इसलिए कानून वापस लेना चाहिए।

बिजनौर में किसानों का चक्का जाम

तीनों कृषि कानून के विरोध में सोमवार को किसानों ने बिजनौर के अलग-अलग जगहों पर चक्का जाम कर प्रदर्शन किया। करीब जिले के 50 जगहों पर किसानों का चक्का जाम देखने को मिला । प्रदर्शन कर रहे किसानों का साफ तौर से कहना है कि अगर केंद्र सरकार जल्द ही कृषि कानूनों को वापस नहीं लेते है तो किसान इसी तरीके से प्रदर्शन करते रहेंगे और आगामी विधानसभा चुनाव में इस प्रदर्शन का असर दिखेगा।

किसानों का प्रदर्शन लगातार गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहा है । वहीं आज भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत के आह्वान पर पूरे भारत बंद का एलान किया गया है । एलान के बाद भी शहर की कुछ दुकानें खुली हुई हैं, तो कुछ बंद दिखीं।

अलीगढ़ में आंदोलनरत किसानों ने यमुना एक्सप्रेस-वे किया जाम
अलीगढ़ में तीनों कृषि कानून के विरोध में सोमवार को किसान गुटों द्वारा भारत बंद का आह्वान करने के बाद रोड पर किसानों का प्रदर्शन देखने को मिला । अलीगढ़ की तहसील गभाना, अतरौली, खैर व इगलास के किसान रोड पर उतरकर जाम और धरना प्रदर्शन कर रहे हैं । वहीं, पुलिस प्रशासनिक अमला हर तरफ अलर्ट नजर आ रहा है ।

प्रदर्शन के दौरान किसान जमकर सरकार के विरोध में नारेबाजी भी कर रहे हैं । तहसील का गभाना क्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे भारतीय किसान यूनियन अम्बाबत गुट के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने बताया कि आज संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले करीब 40 किसान गुटों ने भारत बंद का एलान किया है। उसी कड़ी में यह प्रदर्शन किया जा रहा है ।

उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने किसानों को एक जगह पर रोक कर बंधक बना रखा है और आगे कहीं भी जाने नहीं दे रही है। किसानों की मांग है कि स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाए। किसान आयोग का गठन किया जाए व अन्य मांगें किसानों की पूर्ण की जाएं ।

वहीं आंदोलनरत किसान यमुना एक्सप्रेस-वे को जोड़ने वाले टप्पल-पलवल रोड पर बैठे गए हैं और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं । धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों ने नोएडा को जाने वाली रोड को जाम कर दिया है । किसान यमुना एक्सप्रेस-वे इंटरचेंज के अंडर पास में धरने पर बैठे गए हैं । किसान तीनों कृषि कानून की वापसी की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

मेरठ में 15 जगहों पर चक्का जाम, टोल प्लाजा पर किसानों का कब्जा

तीनों कृषि कानून के खिलाफ मेरठ में भी किसान यूनियन व अन्य किसान संघठनों का प्रदर्शन जारी है। मेरठ जिले से गुजरने वाले NH-58 सिवाया टोल प्लाजा पर भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने ठीक 10 बजते ही जाम लगा दिया। आवाजाही को पूरी तरह से बंद कर दिया गया ।

भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता आवश्यक उपयोग से जुड़े वाहनों व एम्बुलेंसों को तत्काल रास्ता देकर टोल से निकालते देखे गए । मीडिया से बात करते हुए किसान यूनियन के नेताओं ने कहा कि सरकार को दस माह से कृषि कानूनों का विरोध नहीं दिख रहा है । सरकार किसानों की कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर गौर नहीं कर रही है, तो किसान भी सरकार को चेता रहे हैं कि वो पीछे हटने वाले नहीं हैं।

बता दें कि गाजीपुर बॉर्डर पर जब से कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शनकारी जमे हैं, तभी से मेरठ के सिवाया टोल प्लाजा पर भी भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता लगातार धरने पर हैं । किसानों की बढ़ती संख्या को देखकर स्थानीय पुलिस व प्रशासन के अफसर भी वहां डटे हुए हैं ।

जाटलैंड में किसानों का चक्का जाम, सड़कों पर उतरे किसान

बागपत में भी सोमवार को पूरा चक्का जाम रहा । संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारत बंद के दौरान किसान संगठनों, रालोद कार्यकर्ताओं, कम्युनिस्ट पार्टी के लोगों ने हाइवे को जाम कर दिया । इस दौरान बागपत में भी कई चौराहों, रास्तों, नेशनल हाईवे को ब्लॉक कर जाम लगाया गया । बागपत में सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक बन्द का आह्वान किया था ।

बागपत के बड़ौत में औद्योगिक पुलिस चौकी के पास दिल्ली यमनोत्री नेशनल हाइवे पर सैकड़ों की संख्या में किसान पहुंचे ,किसानों ने जमकर नारेबाजी की और साथ ही साथ किसानों ने बड़ौत स्थित दिल्ली बस स्टैंड, खेकड़ा पाठशाला, राष्ट्रवन्दना चौक, किशनपुर बिराल में व बड़ौत मुजफ्फरनगर मार्ग पर पुसार गंव के बस स्टैंड के पास, दाहा व बामनोली गांव , बिनौली क्षेत्र के दादरी गांव के मेरठ, बड़ौत हाइवे समेत कई जगहों पर जाम लगा दिया। इस दौरान किसानों ने सरकार विरोधी नारेबाजी भी की।


पीलीभीत में कई हाईवे जाम

पीलीभीत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आह्वान पर 27 सितंबर को भारत बंद का एलान किया गया था । जिले में भारत बंद का बड़ा असर देखने को मिला। किसानों द्वारा जिले भर के कई हाईवे को जाम किया गया, तो वहीं दूसरी ओर कस्बे समेत कई क्षेत्रों की दुकान बंद नजर आई।

संयुक्त किसान मोर्चा के अंतर्गत आने वाले तमाम किसान संगठनों ने जिले में सुबह से ही अपनी तैयारी पूरी कर रखी थी, जहां एक तरफ व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे, तो वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में किसानों ने पूरनपुर कस्बे के तमाम हाईवे पर जाम लगाया । इसके साथ ही अमरिया, मझोला, बीसलपुर में भी भारत बंद का असर देखने को मिला।

भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सतविंदर सिंह सुबह से ही नवीन मंडी परिसर में किसानों के साथ मौजूद थे । नवीन मंडी परिसर में पुलिस बल भी किसानों पर लगातार निगरानी कर रहा था। 12 बजे के करीब अचानक किसान बड़ी संख्या में एकत्र होकर मंडी परिषद से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे ।

इस दौरान पुलिस ने किसानों को मंडी गेट बंद कर बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की कोशिश की, लेकिन किसानों का गुस्सा कुछ इस कदर हावी नजर आया कि किसानों ने बैरिकेडिंग को तोड़कर हाईवे पर जाम लगा दिया । करीब 2 घंटे तक किसानों ने हाइवे पर जाम लगाए रखा। इस दौरान पुलिस के आला अफसर किसानों को जाम खोलने के लिए मनाते नजर आए।

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