Wednesday, October 20, 2021
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जिले में पानी के नाम पर पानी की तरह बहाया जा रहा पैसा फिर भी आश्रम पद्धति विद्यालय में बूंद बूंद पानी के लिए तरसते बच्चे

लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी टेंकर से पानी खरीदने को मजबूर आश्रम पद्धति विद्यालय का प्रबंध तंत्र

आश्रम पद्धति विद्यालय की वार्डेन ने कहा कि पानी नहीं आने के कारण प्रतिदिन 2 से 3 टैंकर पानी खरीदने को हैं मजबूर

सोनभद्र।जिले के प्रभारी मंत्री इस वक्त जिले में हैं।वह सरकार की चार साल की उपलब्धियों पर प्रकाश डालने के लिए जिले में हैं।संयोग से वही राज्य के शिक्षा मंत्री भी हैं और जिले में गरीबों के बच्चों को पढ़ने के लिए बने आश्रम पद्धति विद्यालय में अभी सितम्बर के महीने में ही टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है।ऐसा नहीं है कि सरकार ने पानी की व्यवस्था नहीं कि है ।

आपको बताते चलें कि विद्यालय परिसर में केवल विद्यालय के लिए एक पानी की टंकी भी बनी है।परन्तु टँकी में जब पानी जाएगा तभी तो उससे सप्लाई होगी।अभी आश्रम पद्वति विद्यालय में पानी के लिए जिला खनिज विकास निधि से 20.44 लाख रुपये से पाइप लाइन बिछाकर पानी सप्लाई के लिए धन खर्च किया गया है परंतु परिणाम वही ढाक के तीन पात वाली कहावत की तरह सिफर ।जब चारो तरफ बाढ़ का हा हा कार मचा है तब भी आश्रम पद्धति विद्यालय में टैंकर से पानी खरीदने का मतलब साफ है किपानी की सप्लाई करने के लिए 20 लाख रुपये आखिर कहां और क्यूँ खर्च किये गए।

पानी की सप्लाई के लिए 20 लाख DMF से खर्च किया गया

वैसे मंत्री जी को सब कुछ चाक चौबंद दिखाने के लिए अधिकारियों ने पूरा प्रबन्ध कर ही दिया होगा।परन्तु विद्यालय के अंदर टैंकर से पानी भरते इन गरीब बच्चों की तरफ थोड़ी तवज्जो पड़नी चाहिये और मंत्री महोदय इन अधिकारियों से यह भी पूछा जाना चाहिए कि यदि 20 लाख रुपये में वाटर सप्लाई करने के लिये पाइप लाइन बिछायी गयी तो वह अभी सितम्बर के महीने में ही क्यूँ पानी की सप्लाई करने में असफल हो गई है।जब चारों तरफ पानी ही पानी है तब भी उस पाईप लाइन से पानी की सप्लाई क्यूं नहीं हो पा रही है।क्या जिस इंजीनियरिंग का लोहा पूरा विश्व मानता है वह यहाँ की मिट्टी में फेल है अथवा बात कुछ और ही है।फिलहाल इस बात पर सरकार व सरकार के नुमाइंदों को विचार करना होगा कि समीक्षा फाइलों में नहीं कार्यों की समीक्षा धरातल पर करना होगा।

फाइलों में तो हो सकता है सब कुछ चाक चौबंद मिले परन्तु योजनाओं की परीक्षा तो धरातल पर होगी।समीक्षा करने से पहले यह बजी देखना होगा कि धरातल पर वास्तविकता क्या है।फिलहाल ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वर्तमान सरकार के नुमाइंदे धरातल पर नहीं फाइल देखकर ही डींग हांक रहे हैं।जब धरातल पर पहुँचेंगे तब पता चलेगा कि उनके पैर के नीचे भी जमीन नहीं बची है।

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