Saturday, October 16, 2021
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इस बार के नवरात्रि में सिर्फ आठ दिन ही होगी मां दुर्गा की उपासना व व्रत

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शारदीय नवरात्र 2021 इस साल सात अक्टूबर से आरम्भ हो रहे हैं. इन्हें अश्विन नवरात्र भी कहते हैं । नवरात्र के नौ दिन देवी मां की उपासना के लिए बहुत विशेष महत्व रखते हैं, जिसके बारे में पंडित सत्येंद्र पाण्डेय से खास बातचीत की.

सोनभद्र । शारदीय नवरात्र सात अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं. इस बार नवरात्रि नौ दिन नहीं बल्कि आठ दिनों तक चलेगी. क्योंकि इस बार दो नवरात्र एक साथ पड़ रहे हैं. इसको लेकर पंडित सत्येंद्र पांडेय ने विंध्यलीडर को जानकारी दी ।

पंडित जी ने बताया कि इस बार तीसरा और चौथा नवरात्र एक ही दिन पड़ने के कारण नवरात्र सात अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक मनाए जाएंगे और 15 अक्टूबर को दशहरा है.

पंडित जी ने बताया कि सात अक्टूबर से मां दुर्गा की उपासना के दिन शुरू हो रहे हैं। इन दिनों में मां शक्ति के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा और आस्था से मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करते हैं ।

मां दुर्गा उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसके साथ ही पंडित जी ने बताया कि नवरात्रों में कई अहम और महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ।

खास तौर पर नवरात्रों के दिन में अपने घर में पूर्ण रूप से साफ सफाई रखें और 9 दिनों तक सात्विक भोजन ही करें शास्त्रों में बाहर का और किसी दूसरे के घर का भोजन करना भी नवरात्रों में वर्जित माना गया है।

नवरात्र 2021इसके आगे झंडेवालान मंदिर के पुजारी ने बताया कि नवरात्र के दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना के दौरान माता को सोलह सिंगार अर्पित किया जाता है । इसके साथ ही लाल ,पीले ,सफेद आधीरन के वस्त्र भी चढ़ाए जाते हैं ।

आप दिनों के मुताबिक भी माता को वस्त्र अर्पित कर सकते हैं । इसके साथ ही माता को अर्पित किए जाने वाले भोग को पूरी शुद्धता और साफ-सफाई के साथ तैयार करें । मां को ताजे फल भी अर्पित किए जाते हैं ।

फल फूल मिठाई भी पूजा में इस्तेमाल होता है । मां दुर्गा को सच्ची आस्था श्रद्धा से भक्त जो भी अर्पित करते हैं मां उससे प्रसन्न हो जाती हैं ।

आगे पंडित जी ने बताया कि नवरात्रों के दिन कई श्रद्धालु व्रत करते हैं, माना जाता है कि नवरात्रों में सात्विक भोजन करना चाहिए ।

जिसमें नमक- मिर्च न हो प्याज, लहसुन, काली, दाल आदि का सेवन न करें, कूटू का आटा, समा के चावल की खीर, दूध से बने पदार्थ, फल आदि का सेवन किया जा सकता है. तामसिक भोजन वर्जित होता है । क्योंकि ऐसे भोजन से आलस्य आता है । मन शांत नहीं रहता ।

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