Friday, August 6, 2021
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भारत को जनसंख्या बढ़ाने की ज़रूरत, वरना बढ़ेगी मुसीबत- अर्थशास्त्री ने आंकड़े बता दो बच्चों का प्रतिबंध लगाने को बताया गलत

नई दिल्ली ।अर्थशास्त्री स्वामीनाथन एस अंकलेसरिया ने कहा है कि भारत को जनसंख्या बढ़ाने की जरूरत है। अगर ऐसा न किया गया तो देश की मुसीबत बढ़ सकती है। उन्होंने इन दावों के साथ आंकड़े भी दिए और दो बच्चों के प्रतिबंध लगाने से जुड़े फैसले को गलत बताया।बकौल अय्यर, “भारत की फर्टिलिटी गिर रही है। अधिक जनसंख्या के फर्जी डर को त्याग देना चाहिए और कम कामकाजी उम्र के लोगों (15 से 65 वर्ष) और वृद्ध आश्रितों के साथ भविष्य की तैयारी करनी चाहिए।”

अर्थशास्त्री स्वामीनाथन एस अंकलेसरिया ने कहा है कि भारत को जनसंख्या बढ़ाने की जरूरत है। अगर ऐसा न किया गया तो देश की मुसीबत बढ़ सकती है। उन्होंने इन दावों के साथ आंकड़े भी दिए और दो बच्चों के प्रतिबंध लगाने से जुड़े फैसले को गलत बताया।

एक अंग्रेजी अखबार TOI में शनिवार (26 जून, 2021) को प्रकाशित अपने लेख में उन्होंने कहा, “लक्षद्वीप में भाजपाई प्रशासक ने उन प्रस्तावों से लोगों में उत्तेजना पैदा की, जिनमें दो बच्चों से ज्यादा वालों को पंचायत चुनाव की उम्मीदवारी से बाहर किए जाने से जुड़ा मसौदा भी है। यह नासमझी है। भारत और दुनिया को ज्यादा नहीं बल्कि अपर्याप्त जन्मों का सामना करना पड़ता है।” उनके मुताबिक, चीन ने एक बच्चे की नीति लागू की, बाद में दो के लिए मंजूरी दी और अब वह तीन बच्चों के लिए बढ़ावा दे रहा है। चूंकि, उसकी कामकाजी उम्र की आबादी गिर रही है, इसलिए जीडीपी को बढ़ावा देने के लिए उसे और अधिक श्रमिकों की सख्त जरूरत है। स्थिर जनसंख्या के लिए कुल फर्टिलिटी रेट – हर महिला पर जन्मा बच्चा – 2.1 होना चाहिए। यह एकदम से जनसंख्या वृद्धि को नहीं रोकेगा। भविष्य में मां बनने वाली औरतें पैदा हो चुकी हैं, इसलिए आबादी दो दशक तक 2.1 पर पहुंचने तक बढ़ती रहेगी और फिर वृद्धि की रफ्तार कम हो जाएगी।

बकौल अय्यर, “भारत की फर्टिलिटी गिर रही है। अधिक जनसंख्या के फर्जी डर को त्याग देना चाहिए और कम कामकाजी उम्र के लोगों (15 से 65 वर्ष) और वृद्ध आश्रितों के साथ भविष्य की तैयारी करनी चाहिए।” हालांकि, उन्होंने आगे लिखा- बच्चे के अच्छे पालन-पोषण की लागत बढ़ गई है, इसलिए लोग दो बच्चों का भी खर्च नहीं उठा सकते। कई देश तो बच्चे की मुफ्त देखभाल, लंबी मैटर्निटी और पैटर्निटी लीव, मुफ्त चाइल्ड केयर हेल्थ और ऐसे ही मिलते जुलते लाभ और सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं। फिर भी उनकी फर्टिलिटी गिर रही है।

उन्होंने कुछ मुल्कों का जिक्र किया और बताया, ताइवान में यह दर सबसे कम है। वहां यह आंकड़ा 1.07 है। दक्षिण कोरिया में 1.09, सिंगापुर में 1.15 है। यहां तक की अमीर देश में भी यह डेटा रीप्लेसमेंट लेवल से नीचे है। मसलन जापान में 1.38, जर्मनी में 1.48, यूएस में 1.84 और यूके में 1.86 है। अफ्रीकी देशों में यह दरें अभी भी तीन से नीचे है। पर मेक्सिको में फर्टिलिटी 2.14 से कम है।

भारत का उल्लेख करते हुए वह बोले- भारत का फर्टिलिटी रेट 1992 से 1993 में 3.4 बच्चों का था, जो कि आज 2.2 पर आ गया है। माना जा रहा है कि 2025 में यह गिरकर 1.93 हो सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि महात्वाकांक्षी मध्यम वर्गीय लोग कम बच्चे चाहते हैं। अत्यधिक आबादी से दूर भारत अपर्याप्त फर्टिलिटी रेट के वैश्विक जाल, कामकाजी उम्र के कम लोगों और बड़ी संख्या में बुजुर्ग लोगों को महंगी चिकित्सा देखभाल की जरूरत वाले दौर की ओर बढ़ रहा है।

कौन हैं एसए अय्यर?: मौजूदा समय में वह अंग्रेजी बिजनेस अखबार ‘दि इकनॉमिक टाइम्स’ में कंसल्टिंग एडिटर हैं। वह विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक में भी कंसल्टेंट रहे हैं। वह इसके अलावा जाने-माने स्तंभकार और टीवी कमेंटेटर भी हैं। ब्रूकिंग्स संस्थान के स्टीफन कोहन द्वारा उन्हें देश के टॉप आर्थिक जगत के पत्रकारों में गिनाया जा चुका है। अंग्रेजी अखबार ‘दि टाइम्स ऑफ इंडिया’ में साल 1990 से उनका साप्ताहिक कॉलम भी छप रहा है, जिसका नाम- ‘स्वामिनॉमिक्स’ है।

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