Saturday, September 18, 2021
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हाइकोर्ट के आदेश पर नगरपालिका क्षेत्र के जमींदारी वाले इलाके की तैयार की जा रही खतौनी

पिछले कई सालों से तहसील प्रशासन के द्वारा नगरपालिका परिषद के उस हिस्से की जहाँ जमींदारी कानून लागू थे ,का खसरा खतौनी का इंद्राज नही करने से लोग अपने जमीनों के मालिकाना हक वाले कागजात के लिए परेशान थे।अब हाइकोर्ट के आदेश से लोगों को राहत मिलेगी।

सोनभद्र । जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 के प्रावधान टांड के डौर उर्फ राबर्ट्सगंज के एक बड़े हिस्से(नगरपालिका परिषद के एक हिस्से) में यह प्रावधान लागू नहीं हैं। चूंकि उक्त हिस्से में अभी भी जमींदारी का ही कानून व्यवस्था चलती है इसीलिए 1995 से लेकर अब तक जिला प्रशासन भी इस हिस्से की खसरा खतौनी बनाने व इसके रख रखवा के मसले पर टालमटोल का रवैया अपनाए हुआ था। जमींदारी वाले भू भाग में ज़मीनों के रिकार्ड की लिखा पढ़ी (खसरा खतौनी) के प्रति जिलाप्रशासन के इस रुख से परेशान जमींदार ने उच्चन्यायालय में वाद दायर कर जिलाप्रशासन द्वारा खसरा खतौनी दुरुस्त करने की मांग की । हाईकोर्ट में मामले कि सुनवाई के पश्चात कोर्ट से मिले आदेश के क्रम में प्रशासन द्वारा 1995 से अब तक खतौनी का रिकर्ड मेंटेन करने का काम तेज कर दिया गया है। वहीं इस अवधि (1995 से अब तक) में रिकॉर्ड मेंटेन ना करने वाले लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई की भी बात की जा रही है।

राबर्ट्सगंज तहसील प्रशासन की प्रारंभिक जांच में इसके लिए 12 लेखपालों की जिम्मेदारी तय की गई है। जिसमें तीन की मृत्यु हो चुकी है। एक को बर्खास्त किया जा चुका है। एक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। शेष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। उप जिलाधिकारी दुद्धी, उपजिलाधिकारी ओबरा और उप जिलाधिकारी घोरावल को भी पत्र जारी कर कार्रवाई के लिए कहा गया है। उधर, हाईकोर्ट ने इसी आधार पर मामला निर्णित करते हुए दो माह के भीतर सारा अभिलेख अपडेट करने का आदेश दिया है। ऐसा न करने पर वादी के पास अवमानना याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला रहेगा

आपको बताते चलें कि टांड के डौर उर्फ राबर्ट्सगंज में नगरपालिका परिषद के एक हिस्से अमरनाथ महाल का जमींदार बताने वाले पारसनाथ अग्रहरी ने अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग किया की राबर्ट्सगंज के जितने हिस्से पर जमींदारी विनाश कानून के प्रावधान लागू नहीं है अर्थात उक्त हिस्से पर जमींदारी वाला कानून लागू होने के बावजूद उक्त क्षेत्र का जिला प्रशासन द्वारा 1995 से अब भूमि रिकार्ड (खसरा खतौनी) मेंटेन नहीं कर रहा है। उन्होंने इसके लिए डीएम को निर्देश दिए जाने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से जानकारी मांगी। इसमें 1995 से अब तक जमींदारी से जुड़ी प्रक्रिया के तहत खतौनी का लेखन कार्य ना होने का मामला सामने आया। इस पर हाईकोर्ट ने डीएम से अब तक खतौनी अपडेट क्यों नहीं की गई? इसको लेकर की जा रही कार्रवाई और अद्यतन स्थिति का विवरण मांगा।

उच्चन्यायालय द्वारा जबाब मांगे जाने के बाद डीएम की तरफ से स्टैंडिंग काउंसिल के जरिए कोर्ट को जानकारी दी गई कि तत्कालीन जिलाधिकारी की तरफ से 25 अगस्त 2020 को ही ग्राम टांड के डौर उर्फ राबर्ट्सगंज के जमींदारी की खतौनी खसरा एवं अन्य अभिलेखों की पड़ताल एवं अद्यतन करने के लिए टीम गठित की गई है। कोरोना व्यस्तता के कारण नानजेडए के खतौनी का लेखन कार्य फिलहाल पूर्ण नहीं हो पाया है। डीएम ने दो माह के भीतर नानजेडए खतौनी का लेखन कार्य पूर्ण करा देने की बात कोर्ट से कही है तथा 1995 से अब तक खसरा खतौनी के लेखन का जो कार्य नहीं किया गया है इस मसले पर डीएम की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि इसको लेकर की गई जांच में 1995 से अब तक कार्यरत लेखपालों की प्रथमदृष्टया शिथिलता पाई गई है। उक्त जिम्मेदार लेखपालों पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है।

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