Saturday, September 18, 2021
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सोनिया गांधी ने बुलाई 18 विपक्षी दलों की बैठक, आम आदमी पार्टी और अकाली दल को नहीं मिला निमंत्रण

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह बैठक पेगासस जासूसी विवाद और हाल ही में संपन्न मानसून सत्र में हुए हंगामे को लेकर जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच बुलाई है.

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नई दिल्ली । कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी विपक्षी एकजुटता की कवायद के तहत शुक्रवार को देश के 18 विपक्षी दलों के साथ डिजिटल बैठक करेंगी. इसमें पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और झारखंड के मुख्यमंत्री भी शामिल हो सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी देश के सामने खड़े प्रमुख मुद्दों पर विपक्षी दलों को साथ लेकर सरकार को घेरने की कोशिश में हैं और इसी प्रयास के तहत यह बैठक बुलाई गई है. विपक्षी दल राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुकाबला करने के वास्ते एकजुट होने के लिए प्रयासरत हैं, ताकि अगले लोकसभा चुनाव में विपक्ष की ओर से कड़ी चुनौती पेश की जा सके.

हाल ही में संपन्न हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान पेगासस जासूसी विवाद, किसान आंदोलन और महंगाई के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ विपक्षी एकजुटता देखने को मिली. इस दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी विपक्षी एकजुटता की पूरी कवायद के केंद्र बिंदु नजर आए. सोनिया गांधी के साथ डिजिटल बैठक के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार समेत कई विपक्षी नेताओं को आमंत्रित किया गया है.

वहीं बैठक में दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) शामिल नहीं होगी. अंग्रेजी अखबार के अनुसार वर्चुअल मीटिंग में मौजूद रहने वाले एक शीर्ष नेता ने कहा, ‘हमने आप को आमंत्रित नहीं किया है, क्योंकि बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस की अतंरिम अध्यक्ष कर रही हैं.’ उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘आप और कांग्रेस दोनों एक ही राजनीतिक मंच को साझा करने में असहज हैं.’

अकाली दल को भी नहीं मिला निमंत्रण
पार्टी पदाधिकारियों ने पुष्टि की है कि शिरोमणि अकाली दल को भी आमंत्रित नहीं किया गया है. अकालियों ने पिछले साल तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को लेकर एनडीए छोड़ दिया, लेकिन मुख्यधारा के विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने के बजाय, उन्होंने कृषि कानूनों पर अपना ध्यान केंद्रित किया और एक अलग रास्ते पर चल रहे हैं. छह महीने के दरम्यान पंजाब में चुनाव होने के कारण, कांग्रेस और उसके प्रतिद्वंद्वी अकालियों को एनडीए के खिलाफ एक साझा मंच साझा करने में कोई दिलचस्पी नहीं होगी.

बहुजन समाज पार्टी को आमंत्रित किया गया है, लेकिन अभी तक पार्टी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह बैठक में मौजूद रहेगी या नहीं. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और अन्य नेता बैठक में शामिल होंगे.

सोनिया गांधी ने यह बैठक पेगासस जासूसी विवाद और इसे लेकर संसद के हाल में संपन्न मानसून सत्र में हुए हंगामे को लेकर जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच बुलाई है. हालांकि, बैठक का एजेंडा सामने नहीं आया है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि बैठक में विपक्षी दलों के मुद्दों पर चर्चा करने और विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के तरीकों पर विचार विमर्श होगा. सूत्रों का कहना है कि अफगानिस्तान के हालात और पूर्वोत्तर के कुछ हालिया घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में विपक्षी दल सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल कर सकते हैं.

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