Saturday, September 18, 2021
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शिक्षक दिवस से संयुक्त किसान मोर्चा का ‘मिशन यूपी’, 25 सितंबर को भारत बंद का आह्वान

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कृषि कानूनों के खिलाफ किसान बीते नौ महीने से दिल्ली के बॉर्डरों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी बीच ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव अतुल अंजान ने कहा कि किसान मोर्चा अपने मिशन यूपी का एलान 5 सितंबर को मुज़फ्फरनगर की ऐतिहासिक रैली से करेगा. इसके अलावा किसान मोर्चा ने 25 सितंबर को संपूर्ण भारत बंद का आह्वान भी किया है. 

नई दिल्ली । कृषि कानूनों को रद्द और एमएसपी पर खरीद को कानूनी बनाने की मांग के साथ बीते नौ महीनों से दिल्ली के बॉर्डरों पर धरना प्रदर्शन कर रहे किसान मोर्चा ने सिंघु बॉर्डर पर चले दो दिवसीय अधिवेशन के बाद बड़ी घोषणा कर दी है. 5 सितंबर को मुज़फ्फरनगर में होने वाले किसान महापंचायत में किसान मोर्चा अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में जुटा है. मुज़फ्फरनगर किसान नेता राकेश टिकैत का गृह जिला है और ऐसे में टिकैत पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड से किसानों के जत्थे जुटाने के लिये लगातार दौरे कर रहे हैं.

किसान मोर्चा की तरफ से मीडिया को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव अतुल अंजान ने कहा कि किसान मोर्चा अपने मिशन यूपी का एलान 5 सितंबर को मुज़फ्फरनगर की ऐतिहासिक रैली से करेगा. कड़े तेवर दिखाते हुए किसान नेताओं ने सरकार को एक बार फिर चेताया है कि वह जल्द से जल्द किसानों की बात मानें नहीं तो अराजकता का माहौल पैदा हो सकता है.

इसके अलावा 25 सितंबर को संपूर्ण भारत बंद का आह्वान भी किसान मोर्चा द्वारा किया गया है. अतुल अंजान ने कहा कि यह भारत बंद आज़ादी के बाद सबसे बड़ा बंद साबित होगा. अतुल अंजान ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान 650 से ज्यादा किसानो की मौत हो चुकी है और उनकी कुर्बानी को जाया नहीं जाने दिया जाएगा.

दिल्ली-हरियाण सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के नौ माह पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चा ने दो दिवसीय अधिवेशन का आयोजन किया, जिसमें बतौर किसान मोर्चा सभी राज्यों के 2500 से 3000 किसान प्रतिनिधि पहुंचे थे. 22 राज्यों के किसान नेताओं ने मंच से संबोधन भी किया.

दूसरी तरफ राकेश टिकैत ने चंडीगढ़ में मीडिया को संबोधित करते हुए एक बार फिर अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि मोदी सरकार किसी पार्टी या जनता की नहीं रही, बल्कि यह कॉरपोरेट घरानों की सरकार रह गई है. गन्ने पर 5 पैसे प्रति किलो बढ़ा कर केंद्र सरकार पीठ थपथपा रही है, लेकिन यह नहीं देख रही कि डीजल पेट्रोल और अन्य चीजों की महंगाई किस दर से बढ़ी है.

अपने बड़बोलेपन के अंदाज़ में बोलते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि अडानी के जितने गोदाम हैं वह तोड़ दिये जाएंगे और किसान वहां पर अपनी छप्पड़ खड़ी करेंगे. वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर नेता अतुल अंजान ने सरकार की ‘ईंट से ईंट बजाने’ और ईंट का जबाब पत्थर से देने की बात कही.

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