Friday, September 17, 2021
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बीएसपी 23 जुलाई से शुरू करेगी ब्राह्मण जोड़ो अभियान

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है. इसीक्रम में बसपा प्रमुख मायावती ने कहा है कि वह 23 जुलाई से बहुजन समाज पार्टी ब्राह्मण समुदाय को जोड़ने के लिए अयोध्या से एक कैंपेन लॉन्च करेगी. इस अभियान को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र संभालेंगे.

लखनऊ । बसपा सुप्रीमो मायावती ने दावा किया कि उत्तरप्रदेश में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं करेंगे. मायावती ने बताया कि 23 जुलाई से बहुजन समाज पार्टी ब्राह्मण समुदाय को जोड़ने के लिए अयोध्या से एक कैंपेन लॉन्च करेगी. इस अभियान का नेतृत्व बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र करेंगे. यह जानकारी उन्होंने रविवार को दी.

उनका कहना है कि इस कैंपेन के जरिेए वह ब्राह्मणों को संदेश देना चाहती हैं कि बीएसपी राज में उनके हितों का ख्याल रखा जाता है. दरअसल संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू होने वाला है. सत्र से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी रणनीति के बारे में जानकारी दी. उन्होंने केंद्र सरकार पर महंगाई, पेट्रोल और गैस की बढ़ती कीमत के साथ कोविड वैक्सिनेशन में कमियों पर निशाना साधा. उन्होंने सभी विपक्षी दलों से इन मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की ताकि सरकार को जवाब देह बनाया जा सके.

एएनआई का ट्वीट

यूपी के 2007 के चुनाव में बसपा ने 403 में 206 सीटें जीती थीं

माना जा रहा है कि बसपा के ब्राह्मण वोट को जोड़ने वाले बयान के बाद यूपी की राजनीतिक खलबली मचनी तय है. मायावती अभी तक चार बार उत्तर प्रदेश की सीएम रह चुकी हैं. अपने चौथे कार्यकाल के लिए उन्होंने अपने सोशल इंजीनियरिंग की बदौलत पूर्ण बहुमत हासिल किया था. 2007 में उन्हें 403 सीटों वाली विधानसभा में 206 सीटें मिलीं थीं. उनकी सोशल इंजीनियरिंग के इंजीनियर सतीश चंद्र मिश्र ही थे. तब इस वोट कॉम्बिनेशन की बदौलत ‘बीएसपी का नारा, हाथी नहीं, गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है’ काफी पॉपुलर हुआ था.

यूपी की आबादी में दलित 20 फीसदी हैं, तो जाटव समुदाय की जनसंख्या 12 फीसदी है. उत्तर प्रदेश की कुल आबादी का लगभग 10 फीसदी ब्राह्मण हैं. रविवार को ब्राह्मण जोड़ो अभियान की घोषणा कर मायावती ने साफ कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह ब्राह्मण उम्मीदवारों पर दांव लगाएगी. पार्टी के पास सतीश चंद्र मिश्र के अलावा रामवीर उपाध्याय जैसे चेहरे हैं, जो पश्चिम यूपी की राजनीति पर बेहतर पकड़ रखते हैं.

पीएम नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान ओबीसी और दलित चेहरों को प्रमुखता दी थी. उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी से सिर्फ एक ब्राह्मण चेहरे को शामिल किया था. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ऐसे में बीएसपी का कैंपेन ब्राह्मणों को वोट करने के लिए नया ऑप्शन जरूर देगा. चूंकि बीएसपी स्थानीय स्तर पर ब्राह्मण नेतृत्व का प्रयोग कर चुकी है, इसलिए उसे मजबूत कैडिडेट तलाशने में दिक्कत नहीं होगी.

सतीश मिश्र संभालेंगे अभियान

सतीश चंद्र मिश्रा बहुजन समाज पार्टी के वरिष्‍ठ नेता हैं. पेशे से वकील, सतीश चंद्र मिश्रा 2004 से लगातार राज्यसभा के सदस्य हैं. वह मायावती के बेहद खास नेताओं में गिने जाते हैं. बहुजन समाज पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव के रूप में भी उनकी पहचान है. माना जाता है कि मायावती अपने हर बड़े फैसले में सतीश चंद्र मिश्र की राय जरूर लेती हैं.मायावती 2007 में भी अपनी राजनीतिक सोशल इंजीनियरिंग का सफल प्रयोग कर चुकी हैं.

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