Monday, September 20, 2021
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पुलिस की पिटाई से मौत-लाठीचार्ज की मजिस्ट्रेटी जाँच शुरू,पांच पर हत्या का मुकदमा,एसओ, हल्का दरोगा लाइन हाजिर

पुलिस द्वारा कथित पिटाई से हुई सेवानिवृत्त लिपिक की मौत के मामले में पांच पट्टीदारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस द्वारा पिटाई और लाठीचार्ज की जांच के लिए मजिस्ट्रेटी जांच (Magisterial Inquiry) बिठा दी गई है।

ग्रामीणों की नाराजगी को देखते हुए तात्कालिक तौर पर कोन थानाध्यक्ष और हल्का दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

लाठीचार्ज मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई न होने को लेकर नाराजगी की स्थिति बनी हुई है।

थाना घेराव के दौरान थाने का गेट खोलने का प्रयास करते ग्रामीण

पुलिस का दावा है कि स्थिति नियंत्रित कर ली गई है। स्थिति को देखते हुए पूरी रात जिलाधिकारी अभिषेक सिंह और एसपी अमरेंद्र प्रताप सिंह मौके पर जमे रहे। सुबह पांच बजे हालात सामान्य होने के बाद शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका।

लाठीचार्ज में घायल मृतक का बड़ा पुत्र

सोनभद्र। आपको बताते चलें कि मिश्री गांव में सोमवार की देर शाम दो पक्षों में जमीनी विवाद की सूचना पर पुलिस पहुंची थी। ग्रामीणों और परिवारी जनों का आरोप है कि पुलिस ने दूसरे पक्ष के प्रभाव में आकर मृतक राजकुमार दुबे को दबाव में लेने की कोशिश की।जब उन्होंने एतराज जताया तो पुलिस द्वारा उनकी पिटाई कर दी गई जिससे उनकी हालत बिगड़ गई।उनकी तबीयत बिगड़ती देख पुलिस टीम वहां से भाग निकली। परिवार के लोग वाहन का इंतजाम कर राजकुमार को उपचार के लिए कोन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां चिकित्सकों ने देखते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया। उसके बाद गुस्साए परिजन व कुछ ग्रामीण उसी वाहन से मृतक को लेकर कोन थाने पहुंच गए और थानाध्यक्ष एवं अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। भीड़ ज्यादा देख पुलिसकर्मियों ने थाने का गेट अंदर से बंद कर लिया ।

लाठीचार्ज में घायल महिला

पुलिस की कथित पिटाई से मृत्यु होने से नाराज ग्रामीण थाने का गेट खोल कर अंदर जाने की कोशिश करने लगे। तभी वहां चांचीकला चौकी इंचार्ज जानी अरशद और पीएसी की एक टुकड़ी पहुंच गई। ग्रामीणों का आरोप था कि आते ही उक्त लोगों ने थाने का घेराव कर कार्रवाई की मांग कर रहे लोगों को पीटना शुरू कर दिया। भाग रहे लोगों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया ।यहाँ तक कि घर में छुपने की कोशिश कर रहे लोगों को भी घर के अंदर घुसकर पीटा गया। स्थिति ज्यादा गंभीर देख कई लोग पास के पानी भरे खेत और मेड़ के नीचे छिप कर खुद को बचाया। आरोप है कि घटना को कवर कर रहे मीडिया कर्मियों को भी दौड़ाया गया। स्थिति की गंभीरता व विगड़ती कानून व्यवस्था की जानकारी के बाद रात 10 बजे एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह घटना स्थल पर पहुंचे और मृतक के परिजनों सहित अन्य ग्रामीणों से बातचीत कर जानकारी ली। सभी ने पुलिस पर मामले की लीपापोती सहित स्थिति को गंभीर बनाने का आरोप लगाया। स्थिति की जानकारी प्राप्त होने के बाद रात में ही 12:30 बजे जिलाधिकारी अभिषेक सिंह भी कोन घटना स्थल पर पहुंच हालात का जायजा लिया। लाठीचार्ज के बाद भी शव के साथ परिवारीजन व ग्रामीण थाने से कुछ दूरी पर दोसी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करने को लेकर जमे रहे। रात तीन बजे तक चली पंचायत के बाद मृतक के बेटे चंद्र प्रकाश दुबे ने पुलिस को तहरीर दी जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही में पुलिस जुट गई।तहरीर के आधार पर मृतक राजकुमार दुबे के विपक्षी देवकी नंदन दुबे, हृदयानंद दुबे पुत्रगण अयोध्या दुबे, संजय दुबे पुत्र कृष्णा दुबे, उनकी पत्नी निर्मला देवी, पुत्री छोटी दुबे के खिलाफ धारा 147, 302, 504, 506 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज हो गई है। फिलहाल कुछ सामाजिक लोगों के समझाने-बुझाने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ तो हत्या की तहरीर नहीं दी गई लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग पर परिवारीजन तथा ग्रामीण अड़े रहे। यह देख जिलाधिकारी ने पिटाई से युवक की मौत तथा थाना गेट पर किए गए लाठीचार्ज के मामले की मजिस्ट्रियल जांच का आदेश दे दिया है तथा पुलिस अधीक्षक ने थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह और हल्का दरोगा सुनील कुमार दीक्षित को लाइन हाजिर कर तात्कालिक तौर पर मामले को तो शांत करा दिया है तथा आज सुबह पांच बजे शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि मामले में मृतक के पुत्र की तहरीर पर पांच के खिलाफ कोन थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज हो गया है तथा पुलिस पर लगाए जा रहे पिटाई के आरोप तथा थाने पर कार्रवाई की मांग को लेकर पहुंचे लोगों पर अचानक लाठीचार्ज के आरोपों की जांच के लिए एडीएम को मजिस्ट्रेटी जांच शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। 3 दिन के भीतर उन्हें जांच पूरी करने की हिदायत भी दी गई है। आपको बताते चले कि जांच में यदि पुलिस कर्मियों के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप सही साबित होते हैं तो उनके खिलाफ भी हत्या के आरोप सहित विभागीय कार्रवाई कराई जाएगी।

लाठीचार्ज में दो का हाथ फ्रैक्चर, कई घायल प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों की बात पर यकीन करें तो लाठीचार्ज में मृतक के बड़े बेटे उपेंद्रनाथ और एक महिला का एक हाथ फ्रैक्चर हो गया है। फिलहाल उपेंद्र का इलाज कोन पीएचसी में कराए जाने की बात बताई जा रही है। पुलिस की पिटाई से कई अन्य भी चोटिल बताए जा रहे हैं। फिलहाल मजिस्ट्रेटी जांच का हवाला देते हुए पुलिस उक्त प्रकरण पर कुछ भी कहने से बच रही है।

डीएम अभिषेक सिंह के निर्देश के बाद कोन में सेवानिवृत्त लिपिक की पुलिस द्वारा पिटाई तथा ग्रामीणों पर पुलिस लाठीचार्ज की मजिस्ट्रियल जांच एडीएम आशुतोष दुबे ने शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिस किसी के पास भी कोई साक्ष्य हो, वह उनके कार्यालय में 19 अगस्त तक कार्य दिवस के समय आकर बयान एवं साक्ष्य दर्ज करा सकते हैं। बताया कि मृतक के पुत्र चंद्र प्रकाश दुबे ने डीएम को दिए प्रार्थना पत्र में अवगत कराया है कि उनके पट्टीदारों ने उनकी पुश्तैनी जमीन और मकान को फर्जी तरीके से अपने नाम करा लिया है। इसी विवाद के संबंध में सोमवार को 6:30 बजे प्रभारी निरीक्षक कोन मय पुलिस बल के उनके घर आए। उनके पिता को विपक्षियों के घर ले गए और वहीं उनको मारा पीटा। विपक्षियों से भी मरवाया गया। इसके बाद उसके पिता को पुलिस मौके पर ही छोड़कर भाग गई। पिटाई से हालत बिगड़ने पर वह अपने पिता को डॉक्टर के पास ले गया जिन्होंने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पिता के शव को ग्रामीणों के साथ लेकर थाने पहुंचा उन्हें देख पुलिस ने गेट बंद कर दिया। गेट खुलवाने की कोशिश की तो थानाध्यक्ष के कहने पर उन्हें, परिवार वालों और ग्रामीणों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया, जिससे चोट आई हैं। अपर जिलाधिकारी आशुतोष दुबे ने कहा कि जांच शुरू कर दी गई है 19 अगस्त तक इस मामले में साक्ष्य एकत्रित कर रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी।

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