Wednesday, September 22, 2021
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पंचायत सहायक/डाटा एंट्री ऑपरेटर भर्ती प्रक्रिया का युवाओं में हो रहा विरोध

चुनावों के ठीक पहले ग्रामीण युवाओं को लुभाने के लिए निकाली गई इस भर्ती प्रक्रिया का युवाओं का विरोध कहीं भाजपा को न पड़ जाए भारी

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 में होने वाले हैं परंतु इसके लिए हर दल अभी से ही अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है । कोई ब्राह्मण कार्ड खेल रहा है तो कोई मुस्लिम तो कुछ दल युवाओं की बेरोजगारी का मुद्दा उछाल रहे हैं।यू पी की भाजपा सरकार ने बेरोजगारी की धार को कुंद करने के उद्देश्य से फिलहाल पूरी ताकत से रुकी हुई भर्तियों को जहां एक तरफ पूरा करने की कोशिश में लगी है तो वहीं दूसरी तरफ कुछ नई भर्तियों भी निकाल दिया है।

इसी कड़ी में योगी सरकार द्वारा ग्रामपंचायतों में डाटा एंट्री हेतु संविदा पर ऑपरेटर की भर्ती निकाली है। प्रदेश में जितनी पंचायतें हैं उनमें उतने ही पंचायत सहायक या डाटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति की जाएगी । चुनाव नजदीक है इसलिए हर काम की समय सीमा तय कर दी गयी है । पंचायत सहायक या डाटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति भी 40 दिनों में पूरा करने का निर्देश सभी अधिकारियों को दे दिया गया है ।

इस भर्ती के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित करने की सूचना 30 जुलाई से 1 अगस्त के बीच जारी होनी है लेकिन उसके पहले ही युवाओं में विरोध का स्वर फूटने लगा है । दरअसल योगी सरकार ने इस भर्ती प्रक्रिया के लिए आरक्षण की जो व्यवस्था लागू की है वह युवाओं को रास नहीं आ रहा है । क्योंकि इस भर्ती में आरक्षण वही रहेगा जो अभी हालिया सम्पन्न प्रधान के चुनाव के लिए था।

अर्थात ग्राम पंचायत में ऑपरेटर उसी वर्ग का होगा जिस वर्ग के लिए उक्त ग्रामपंचायत में प्रधान का पद आरक्षित रहा है।युवाओं का विरोध इसी बात को लेकर है। चुनाव के पहले बेरोजगार युवाओं को लुभाने का योगी सरकार यह दांव अब उल्टा पड़ने लगा है । गांव के बेरोजगार युवाओं का कहना है कि यह भर्ती सिर्फ चुनावी भर्ती है और योगी सरकार युवाओं को आपस में बांटने का काम कर रही है । उनका कहना है कि इस आरक्षण व्यवस्था से योग्य युवा वंचित रह जाएंगे । वहीं कई युवाओं का कहना है कि इस भर्ती में सबसे बड़ी कमी शैक्षिकयोग्यता को लेकर है । यह पद पंचायत सहायक या डाटा एंट्री की है लेकिन निकले विज्ञापन में कम्प्यूटर का कोई भी ज्ञान नहीं मांगा गया है ।अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इनकी भर्ती करने के बाद कम्यूटर चलाने के लिए इन्हें प्रशिक्षण भी दिलवाने के लिए किसी स्कूल में भेजेगी या फिर यह भर्ती प्रक्रिया भी बेरोजगारों के लिये हवा हवाई ही है।

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