Friday, September 17, 2021
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ठेके पर चल रहा सोनभद्र का स्वास्थ्य विभाग, आखिर कौन करेगा इसका इलाज ?

सोनभद्र।पिछले कुछ समय से सोनभद्र का स्वास्थ्य विभाग अखबारों की सुर्खियों में है, परन्तु अफसोस कि यह अपने किसी अच्छे कार्य के लिए नहीं अपितु अपने भ्र्ष्टाचार या फिर अपने कदाचार के किसी न किसी खबर के लिए ही सुर्खियां बटोर रहा है।पिछले कुछ समय मे स्वास्थ्य विभाग से सम्बंधित प्रकाशित खबरों पर यदि गौर किया जाय तो उक्त खबरों में स्वास्थ्य विभाग की किसी न किसी करामात की ही पोल खोलती खबरों ने अखबारों की सुर्खियां बटोरीं हैं।

चाहे वह बिना मेडिकल स्वीकृति के लाखों में तनख्वाह निकालने की खबर हो अथवा सांसद महोदय की भी अवमानना करने से क्षुब्ध होकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जिले से बाहर स्थानांतरण करने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के मामले से जुड़ी खबर हो अथवा जिले में एक्सपायरी डी डी टी मिलने के मामले से सम्बंधित खबर हो अथवा सरकारी अस्पताल के शौचालय में 4 महीने का भ्रूण मिलने की खबर हो अथवा जिले की अधिकांश ग्रामीण इलाकों की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों के न आने से उनकी भूमिका केवल रेफरल हॉस्पिटल के रूप में कार्य करने को लेकर छपती खबरें हो अथवा स्थानांतरण के बाद बैक डेट में जबर्दस्ती 50 लाख के भुगतान पर शाइन कराने से सम्बंधित ख़बर हो ,पिछले एक माह में विभन्न समाचार पत्रों में छपी इन खबरों से यह तो स्पष्ट है कि स्वास्थ्य विभाग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

चर्चाओं पर यदि भरोसा किया जाय तो एक बात निकल कर सामने आती है कि इन सब कारणों के पीछे एक बात यह है कि पूरे स्वास्थ्य विभाग को चलाने के लिए कुछ कर्मचारियों को ठेका दे दिया गया है।विभाग में बिना इनकी अनुमति के पत्ता भी नहीं हिलता।विभागीय लोगों का कहना है कि उक्त लोग ही इन सारी दुर्दशा के जिम्मेदार हैं।स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों ने तो दबी जुबान यह भी कहा कि जो लोग इनका विरोध करते हैं उन्हें महत्वहीन पदों पर भेजकर ठिकाने लगा दिया जाता है अथवा उनके खिलाफ डी ओ लेटर लिखवाकर जिले से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। ऐसे में कोई भी कर्मचारी इन मजबूत कॉकस वाले लोगो से उलझना नहीं चाहता।

यदि उक्त बात सही है तो फिर सोनभद्र की बीमार स्यास्थ्य विभाग के इलाज की जरूरत है पर यह कब और कैसे होगा ? इसका जबाब तो आने वाला समय ही बताएगा।अब जब लोगों के इलाज की जिम्मेदारी व व्यवस्था जिस डिपार्टमेंट पर है और जब वही खुद कई प्रकार के गंभीर बीमारियों से ग्रस्त है तो ऐसे में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल क्या होगा आप खुद ही अनुमान लगा सकते हैं।

ऐसे में सोनभद्र के स्वास्थ्य विभाग पर यदि सरकार व सरकार के प्रतिनिधियों ने जल्द ही धयान नहीं दिया और उक्त विभाग के जिस हिस्से में गम्भीर रोग लगे हैं उसका सफल ऑपरेशन नहीं किया तो जिले के गरीबों के लिए एकमात्र सहारा इन सरकारी अस्पतालों के इस तरह असहाय रूप में खड़े रहने के बड़े ही घातक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

आपको बताते चलें कि देश के अति पिछड़े 112 जनपदों की सूची में एक नाम सोनभद्र का भी है ।इन पिछड़े जनपदों को सरकार द्वारा आकांक्षी जिला के रूप में पहचान देकर इन्हें इस श्रेणी से बाहर निकालने के लिए इन जिलों में शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओ को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है।चूंकि शिक्षा व स्वास्थ्य ढांचा ही महत्वपूर्ण दो स्तम्भ हैं इन पिछड़े जनपदों को इस श्रेणी से बाहर निकलने के।परन्तु जब स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार लोग इस तरह से विभाग को चलाएंगे तो पिछड़े जनपद की श्रेणी से बाहर निकलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आती है। की

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