Wednesday, October 20, 2021
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जनतादल यूनाइटेड के जिलाध्यक्ष ने रिहन्द जलाशय में फैक्टरियों से निकले ओद्योगिक कचरा गिराए जाने को लेकर इस्पात मंन्त्री को लिखा पत्र


सोनभद्र में स्थित भारत के गौरव ‘‘रिहंद जलाशय’’ में उसके किनारे पर स्थापित फैक्टरियों द्वारा सरकारी मानकों एवं नियम- कानूनों की खुलेआम अनदेखी कर मनमानी तरीके औद्योगिक एवं रासायनिक कचरा बहाए जाने के संबंध में केंद्रीय इस्पात मंत्री को पत्र लिख कर इस पर रोक लगाने की गुहार लगायी है। उन्होंने पत्र लिखकर कहा है कि उ0प्र0 के सोनभद्र (रेनुकूट) जिले में स्थित एक निजी इंडस्ट्रीज द्वारा सरकारी मानकों एवं नियम- कानूनों यथा- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986, संशोधित 1991 तथा जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1974, संशोधित 1988 तथा वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1981, संशोधित 1987 तथा खतरनाक व अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम 2016 तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 एवं केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी)- एआईएस 219 द्वारा निर्धारित ईएलवी के पर्यावरणीय सुदृढ़ प्रबंधन के लिए दिशा- निर्देश नवंबर, 2016 इत्यादि की खुलेआम अनदेखी एवं मनमानी करने के साथ ही उक्त इंडस्ट्रीज के अधिकारी व कर्मचारीगण उपरोक्त समस्त नियम कानूनों के प्रति पूर्णरूप से भयाहीन होकर तानाशाही तरीके से कार्य कर रहे हैं। जनतादल यूनाइटेड के जिलाध्यक्ष ने सरकारी नियमों की अवहेलना करने का विवरण भी दिया है।उनके अनुसार

  • उक्त इंडस्ट्रीज पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूर्णतया उदासीन है। पेड़- पौधों को लगाने की कौन कहे, उल्टे अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति के तरह भ्रष्ट अधिकारियों से मिलकर लगातार आसपास के जंगल को काटकर अपनी चहारदीवारी में मिलाने का काम वर्षों से अनवरत जारी है। अर्थात् उक्त कम्पनी का भौतिक/ स्थलीय क्षेत्र अनवरत बढ़ता जा रहा है। जिसे स्थानीय क्षेत्र/ रेनुकूट का बच्चा- बच्चा जानता है।
  • उक्त निजी इंडस्ट्री द्वारा उत्सर्जित दूषित जल को सही ढंग से प्रबंधन करने की बजाय ऐसे ही खुलेआम रिहंद डैम में बहा दिया जाता है। जिससे न केवल क्षेत्र में गंदगी व भूगर्भ जल का प्रदूषण दिन प्रतिदिन अनवरत बढ़ता जा रहा है, अपितु रिहंद जलाशय दूषित होने से मनुष्यों के साथ ही जलीय जीवों का भी जीवन खतरे में पड़ गया है।उक्त इंडस्ट्रीज पर्यावरणीय चिंताओं की बिना परवाह किए अपनी चिमनियों को अत्याधुनिक मानकों से सुसज्जित किए बिना औद्योगिक धुंए को घोर लापरवाही के साथ उड़ाते हुए क्षेत्रीय नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहा है । उक्त इंडस्ट्रीज खतरनाक व अन्य ठोस अपशिष्टों (कचरे) को आमजन (विशेषतया- भिखारियों के वेष में कबाड़चोर, जिन्हें इंडस्ट्रीज के कुछ कर्मचारियों व कबाड़ माफियाओं की अनैतिक शह प्राप्त होती है) की पहंुच वाले स्थानों पर खुलेआम फेंकने का करता है। जिससे न केवल विभिन्न प्रकार की स्थानीय सामाजिक बुराइयां उत्पन्न हो रही हैं, अपितु बड़े पैमाने पर मृदा प्रदूषण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
  • राष्ट्रीय इस्पात नीति- 2005 के बिंदु संख्या 11 के क्रम में पर्यावरण संबंधी चिंता विषय पर इस क्षेत्र की इंडस्ट्रीज पूरी तरह से असफल साबित हुई है। जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि,‘‘पर्यावरण संबंधी जांच और जीवन चक्र के आकलन को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि संबंधित प्रक्रियाओं में होने वाले उत्सर्जन और बहिःस्राव में कमी, ठोस अपशिष्ट के सृजन में कमी और उसका बेहतर प्रबंधन तथा ऊर्जा एवं जल जैसे संसाधनों के संरक्षण में सुधार हो सके।’’
  • उपरोक्त बिंदुओं को ध्यान में रखकर रेनुकूट स्थित निजी इंडस्ट्रियों के विरूद्ध जनता दल यूनाइटेड सोनभद्र की कार्याकारिणी का सहयोग एवं साथ लेकर मंत्रालय स्तर के किसी उच्च अधिकारी या सलाहकार परिषद के किसी सदस्य के माध्यम से उच्च स्तरीय जांच कराये जाने की मांग करता है।
  • अतः उपरोक्त के आधार पर जनता दल यूनाइटेड मांग करता है कि भारत के गौरव ‘‘रिहंद जलाशय‘‘ को प्रदूषित कर मानव तथा जलीय जीवों के जीवन को खतरे में डालने, वायु, जल तथा मृदा प्रदूषण बढ़ाने, औद्योगिक ठोस व तरल अपशिष्टों का सही प्रबंधन न करने, विस्तारवादी नीति के तहत जंगल व जमीन को क्षति पहंुचाने एवं उपरोक्त अनेक नियम कानूनों के प्रति पूर्णरूप से भयाहीन होकर तानाशाही तरीके से काम करने वाले रेनुकूट सोनभद्र में स्थित निजी इंडस्ट्रीज के कार्यशैली की उच्च स्तरीय आवश्यक जांच कराकर उपरोक्त समस्त अधिनियमों के अधीन कानूनी कार्रवाई करने की जनतादल यूनाइटेड मांग करता है।
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