Friday, September 17, 2021
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क्या इस योजना के जरिये मोदी सरकार बेच रही है रेलवे समेत कई संपत्तियां ?

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23 अगस्त को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 लाख करोड़ की राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन योजना लॉन्च की. जिसके बाद विपक्ष सरकार पर रेलवे से लेकर टेलीकॉम समेत देश की संपत्ति को बेचने का आरोप लगा रहा है. कुछ लोग इसे रेलवे जैसी संपत्तियों में निजीकरण कह रहे हैं. आखिर क्या है ये राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन ? क्या सच में मोदी सरकार रेलवे और हवाई अड्डों समेंत देश की संपत्तियों को बेच रही है? 

नई दिल्ली । 6 लाख करोड़, जब भी वक्त मिले सोचिये कि इस आंकड़े में कितने शून्य होते हैं. 6 लाख करोड़ की बात इसलिये क्योंकि इतने की ही एक योजना भारत सरकार ने 23 अगस्त को लॉन्च की है. जिसे राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन कहा जा रहा है. इस योजना के बाद सियासी गलियारों में खूब हल्ला भी हो रहा है. मोदी सरकार पर देश की संपत्ति बेचने का आरोप भी लग रहा है. तो क्या सच में मोदी सरकार देश की संपत्ति बेचने जा रही है. आखिर क्या है ये मुद्रीकरण पाइपलाइन ?, इससे क्या फायदा होगा ?. ये जानने से पहले जानते हैं कि क्या है राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन

NMP को नीति आयोग द्वारा बनाया गया है. जिसके तहत वित्त वर्ष 2022 से लेकर 2025 तक की चार साल की अवधि में केंद्र सरकार की संपत्तियों के जरिये 6 लाख करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान लगाया गया है. एनएमपी के तहत विभिन्न क्षेत्रों की सरकारी संपत्तियों में हिस्सेदारी बेचकर या संपत्ति को लीज पर देकर 6 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है.

वित्त वर्ष 2022-25 के लिए क्षेत्र-वार मुद्रीकरण पाइपलाइन (करोड़ रुपये में)

सरकार के पास रेलवे से लेकर खनन समेत कई ऐसे संस्थान और संपत्तियां हैं जिनसे सरकार की कमाई नहीं हो रही है. इसलिये निजी निवेश के जरिये इन क्षेत्रों से सरकार की आय बढ़ेगी. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को एनएमपी को लॉन्च कर इसका खाका पेश किया. जिसके मुताबिक लीज पर देने की प्रक्रिया चार साल यानि साल 2025 तक सिलसिलेवार तरीके से चलेगी.

इस मुद्रीकरण पाइपलाइन में क्या-क्या शामिल है ?

आगामी चार सालों में एनएमपी के तहत 12 से ज्यादा संबंधित मंत्रालय और 22 से ज्यादा संपत्ति श्रेणियां शामिल हैं. जिसमें सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे, रेलवे, प्राकृतिक गैस पाइपलाइन, बिजली उत्पादन, खनन, दूरसंचार, स्टेडियम से लेकर आवास तक शामिल हैं.

मुद्रीकरण पाइपलाइन के तहत इन संपत्तियों का चयन

सरकार को रेलवे और सड़क से सबसे ज्यादा उम्मीद

एनएमपी का जो खाका नीति आयोग ने तैयार किया है वो बताता है कि सरकार को इस योजना के तहत सबसे ज्यादा उम्मीद सड़क और रेलवे से है. कुल 6 लाख करोड़ के अनुमानित लक्ष्य में से 33 फीसदी से अधिक विनिवेश की उम्मीद रेलवे और सड़क से ही है. सड़कों के 1,60,200 करोड़ और रेलवे से 1,52,496 करोड़ रूपये मुद्रीकरण के जरिये सरकार के खजाने में आने का अनुमान है.

क्या सरकार रेलवे, हवाई अड्डे समेत कई संपत्तियां बेच रही है ?

मोदी सरकार की इस योजना को लेकर अब सियासी विरोधी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. राहुल गांधी ने इस योजना के जरिये देश के सरकारी संसाधनों को बेचने का आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने कहा कि 70 साल में जो भी देश की पूंजी बनी, मोदी सरकार ने उसे बेचने का काम कर रही है. नेशनल हाइवे से लेकर गैस पाइपलाइन और वेयरहाउस से लेकर माइनिंग, एयरपोर्ट और बंदरगाह तक सरकार बेच रही है.

खासकर रेलवे को लेकर सियासत खूब हो रही है, राहुल गांधी ने कहा कि रेलवे देश की रीढ़ है. गरीब आदमी एक शहर से दूसरे शहर रेलवे के बिना सफर नहीं कर सकता और सरकार ट्रेन से लेकर रेलवे स्टेशन और रेलवे ट्रैक तक बेच रही है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉन्च की थी राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन योजना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉन्च की थी राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन योजना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्या कहा

वित्त मंत्री के मुताबिक इसमें वो संपत्तियां या संस्थान शामिल हैं जिनका भरपूर उपयोग करके कमाई नहीं की जा रही है. और ऐसा पिछले कई दशकों से हो रहा है. यानि अगर इन्हीं संपत्तियों पर निवेश जुटाएं और निजी क्षेत्र के सहारे इन्हें कमाई का जरिया बनाया जाए तो जनता को भी फायदा होगा और सरकार का भी खजाना भरेगा.

योजना के लॉन्च के दौरान वित्त मंत्री ने साफ कहा कि संपत्ति मुद्रीकरण में ज़मीन की बिक्री शामिल नहीं है. ये सिर्फ उन संपत्तियों के मुद्रीकरण से संबंधित है जिनका भरपूर उपयोग करके कमाई नहीं की जा रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि इन संपत्तियों का मालिकाना हक सरकार के पास ही होगा और तय सीमा के बाद इन्हें वापस सरकार को लौटाना होगा.

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन में किस क्षेत्र की कितनी हिस्सेदारी

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन में किस क्षेत्र की कितनी हिस्सेदारी

यानि इसे बेचना नहीं किराए पर देना कहें तो ठीक होगा

जानकारों का कहना है कि इसे बेचना नहीं बल्कि किराए पर देना कहेंगे. ये संपत्तियों को बेचने की बजाय एक व्यवस्थित ढंग से अनुबंध और साझेदारी के साथ वित्त की व्यवस्था करने की योजना है. आसान भाषा में कहें तो अंडर यूटिलाइज्ड यानि कम उपयोग हुई संपत्तियों का मुद्रीकरण यानि इनमें निजी निवेश लाया जा रहा है.

जैसे निजी निवेश हासिल करने के लिए चेन्नई, भोपाल, वाराणसी, वडोदरा समेत देश के करीब 25 हवाई अड्डे और 40 रेलवे स्टेशनों, 15 रेलवे स्टेडियम और कई रेलवे कालोनियों की पहचान की गई है. ये सभी निजी क्षेत्र के निवेश से विकसित किया जाएगा.

सरकार का सार्वजनिक क्षेत्र में ढांचे को तैयार करने में काफी पूंजी लगती है लेकिन उसके बदले सरकार को बेहतर रिजल्ट या आय नहीं मिल पाती. ऐसे में इस तरह के क्षेत्रों में निजी निवेश के जरिये उस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है और इससे होने वाली आय को अन्य सार्वजनिक निवेश के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

देश की संपत्ति बेच रही है मोदी सरकार- राहुल गांधी

देश की संपत्ति बेच रही है मोदी सरकार- राहुल गांधी

इसका फायदा क्या है ?

सरकार से लेकर कई विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे से लेकर तमाम क्षेत्रों में निजी निवेश के बाद देश में रोजगार के अवसर बढ़ंगे. निजी निवेश और रोजगार बढ़ने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और सरकार के खजाने में पैसा आएगा तो विकास कार्यों को बल मिलेगा.

कुल मिलाकर सरकार की संपत्तियों में निजी भागीदारी लाने से कम उपयोग हुई संपत्तियों का बेहतर दोहन होगा. जिससे ये संपत्तियां मुद्रीकरण के लायक होंगी और इसके जरिये जो भी आय और संसाधन मिलेंगे उसे इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने और निवेश करने में इस्तेमाल हो सकता है

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