Saturday, September 18, 2021
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क्या इसी विकास मॉडल के बूते मिशन 2022 की वैतरणी पार करेगी भाजपा

सोनभद्र । वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव मुख्य रूप से दो मुद्दों पर लड़ा गया था ,एक था सपा की सरकार का अतिशय जातिवाद और दूसरा था भ्रस्टाचार, जिसकी वजह से विकास परक योजनाएं मूर्त रूप नहीं ले पा रही थीं। अब जबकि सरकार लगभग अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी है ऐसे में पेश है सरकार द्वारा कराए गए विकास कार्यों के साथ ही हमारे जनप्रतिनिधियों के जनता व जनहित के मुद्दों पर सम्बेदनशीलता की एक रिपोर्ट। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के समावेशी विकास व भ्रस्टाचार मुक्त शासन के नारे पर विश्वास कर उसे भरपूर वोट दिया फलस्वरूप भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी।

चुनाव के बाद जब भाजपा की सरकार बनी तो जनता को लगा कि जैसे उसे अपने सारे समस्याओं से निजात का रास्ता मिल गया हो। चुकी जनता ने भारी बहुमत देकर भाजपा की सरकार बनाई थी इसलिए जनता को लगा कि उक्त सरकार जनहित के मुद्दों पर सम्बेदनशीलता भी दिखाएगी ।परन्तु जैसे जैसे समय गुजरता गया जनता में मायूसी भी बढ़ती गयी।उत्तर प्रदेश की जनता को न ही जातीय भेदभाव से छुटकारा मिला न ही करप्शन से और न ही अधिकारियों की मनमानी से।

नॉकरशाही के चश्मे से विकास देखने वाले सरकारी नुमाइंदों व जनप्रतिनिधियों को भले ही चारों तरफ सब कुछ चकाचक लगे और जनप्रतिनिधी विकास होने का ढिंढोरा पीटे पर जमीन पर सब कुछ ठीक नजर नहीं आता। इस सरकार के अब तक के कार्यकाल में ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे जनहित से जुड़े मुद्दों की न तो जनप्रतिनिधियों को कोई फिक्र है और न ही अधिकारियों को। आपको वर्तमान सरकार में विकास और जनहित से जुड़े कार्यों पर जनप्रतिनिधियों की सम्बेदनशीलता की बानगी देखनी हो तो सोनभद्र जिले के मुख्यालय राबर्ट्सगंज नगर को देखकर आपको सहज ही जनप्रतिनिधियों की सम्बेदनशीलतलग का अंदाजा लग जायेगा।

आपको बताते चलें कि  जिले की एक मात्र नगर पालिका सोनभद्र द्वारा नगर के विकास का कैसा कार्य हुआ है इसका अंदाजा आपको नगर में हल्की बारिश के बाद ही देखने को मिल जायेगा। हल्की बारिस होते ही नगर पानी पानी हो जाता है।जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण सड़कों पर नाली का गंदा पानी जमा हो जाता है ऐसे में राहगीरों को चलने में भारी समस्याओं से गुजरना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नगर पालिका प्रशासन केवल नालों व गलियों की सफाई ठीक से करवा दिया होता तो नगरवासियों को इस समस्या से बचाया जा सकता था।पानी जाम होने से बजबजाती नालियां कई बीमारियों का कारण भी बन रही हैं। लोगों का कहना है की सभी जनप्रतिनिधि नगर की समस्या पर मौन हैं। सवाल यह उठता है कि जब केंद्र में सरकार भाजपा की, प्रदेश में सरकार भाजपा की, नगरपालिका अध्यक्ष भाजपा का, यहां के विधायक भाजपा के, सांसद भाजपा के तब भी इस नगर का यह हाल है ?सवाल यह उठता है कि क्या जनता की यह समस्या इन जनप्रतिनिधियों को दिखाई नहीं देती?नगर में हर जगह कीचड़ से सनी सड़कें, बजबजाती नालियां,यहाँ तक कि नगर के बीचोबीच बने ओभरब्रिज के दोनों ही तरफ बनी सड़कों पर गड्ढे व कोढ़ में खाज की तरह ऊपर से झरने की तरह गिरता गन्दा पानी , मेन चौक से धर्मशाला चौक , मेन मार्केट रोड़ , नई बस्ती , नवीन सब्जी मंडी के सामने भारी पानी जमा हो जाता है।

पूरे शहर में नाली का गंदा पानी सड़क पर बहने से लोग पैदल भी नही चल पाते है वही आसपास के दुकानदार भी बदबू व गंदा पानी के बू से परेशान रहते है।तेज बारिश के समय आलम यह रहता है की पैदल तो दूर बाइक से भी चलने में गिरने का डर लोगों में बना रहता है और हमारे सम्बेदनशीलता जनप्रतिनिधि मौन व्रत धारण कर चुपचाप निकल जाते हैं। लोगों का मानना है कि यदि हमारे जनप्रतिनिधि थोड़ी भी सम्बेदनशीलता दिखाते तो शायद जनता की यह छोटी छोटी समस्या से तो निजात मिल ही सकती थी।अब तो जनता में निराशा है उसे लगने लगा है कि सरकारें चाहे जिस भी दल की बने उनका चरित्र लगभग एक जैसा ही होता है। लोगों का मानना है कि जनता की आवाज को सुनने वाला कोई नहीं है।अब सवाल यह उठता है कि क्या इसी काम के बूते मिशन 2022 की बैतरणी पर करने उतरेंगे हमारे वर्तमान जनप्रतिनिधि ।

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