Monday, September 20, 2021
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एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूछा- मुख्तार को क्यों नहीं किया जा रहा पेश

पिछली सुनवाई के दौरान जिला कारागार, बांदा के वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने एक प्रार्थना पत्र के माध्यम से अदालत को बताया था कि अभियुक्त को गंभीर बीमारियां हैं जिसकी वजह से अदालत के समक्ष उपस्थित होने में असमर्थ है. लिहाजा गुजारिश है कि उसके विरुद्ध आरोप विरचन की कार्यवाही वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ही की जाए.

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लखनऊ । एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेज जज पवन कुमार राय ने कारापाल व उपकारापाल पर हमला, जेल में पथराव व जानमाल की धमकी देने के मामले में अभियुक्त मुख्तार अंसारी को कई आदेशों के बावजूद व्यक्तिगत रूप से पेश न किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई है.

कोर्ट ने कहा कि पंजाब के रोपड़ जेल से लाने के बावजूद मुख्तार को आखिर क्यों नहीं पेश किया जा रहा है. कोर्ट ने इस संदर्भ में मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव गृह समेत डीजीपी, कमिश्नर लखनऊ पुलिस व अतिरिक्त अतिरिक्त महानिदेशक कारागार को पत्र भेजने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी.

पिछली सुनवाई के दौरान जिला कारागार, बांदा के वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने एक प्रार्थना पत्र के माध्यम से अदालत को बताया था कि अभियुक्त को गंभीर बीमारियां हैं जिसकी वजह से अदालत के समक्ष उपस्थित होने में असमर्थ है. लिहाजा गुजारिश है कि उसके विरुद्ध आरोप विरचन की कार्यवाही वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ही की जाए.

इस पर अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने प्रार्थना पत्र में इस संदर्भ में कोई आख्या नहीं दी है कि उनके द्वारा अभियुक्त को आरोप विरचन के लिए अदालत में उपस्थित कराया जा सकता है अथवा नहीं.

कोर्ट ने कहा कि यह मामला 20 साल से लंबित है लेकिन बार-बार आदेश के बाद भी अभियोजन व संबधित थाने के द्वारा रुचि नहीं लेने के कारण कार्यवाही अग्रसारित नहीं हो पा रही है.

क्या है मामला

इस मामले की एफआईआर 3 अप्रैल 2020 को लखनऊ के कारापाल एसएन द्विवेदी ने थाना आलमबाग में दर्ज कराई थी. इस मामले में मुख्तार अंसारी, युसुफ चिश्ती, आलम, कल्लू पंडित व लालजी यादव आदि को नामजद किया गया था.

एफआईआर के मुताबिक पेशी से वापस आए बंदियों को जेल में दाखिल कराया जा रहा था. इनमें से एक बंदी चांद को विधायक मुख्तार अंसारी के साथ के लोग बुरी तरीके से मारने लगे. आवाज सुनकर कारापाल एसएन द्विवेदी व उपकारापाल बैजनाथ राम चैरसिया तथा कुछ अन्य बंदीरक्षक उसे बचाने पहुंचे.

इस पर इन लोगों ने इन दोनों जेल अधिकारियों व प्रधान बंदीरक्षक स्वामी दयाल अवस्थी पर हमला बोल दिया. किसी तरह अलार्म बजाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया. अलार्म बजने पर यह सभी भागने लगे. साथ ही इन जेल अधिकारियों पर पथराव करते हुए जानमाल की धमकी भी देने लगे.

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