Thursday, September 23, 2021
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एनसीएल के सीएमडी के भ्रष्टाचार को खंगालने कभी भी धमक सकती हैं विजिलेंस और ईडी की टीम

राजेन्द्र द्विवेदी

एनसीएल के सीएमडी पर भ्रष्टाचार को लेकर मन्त्रिमण्डल के सतर्कता एवम शिकायत प्रकोष्ठ ने सांसद के पत्र पुष्टि के बाद शुरू की जांच ,विजिलेंस और ई डी भी हो सकती है जाँच एजेंसी , कभी भी हो सकती है बड़ी प्रशासनिक कार्यवाही ?

सोनभद्र । नार्दन कोल लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक के विरुद्ध रॉबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र के सांसद पकौड़ी लाल कोल के पत्र और प्रधानमंत्री की संस्तुति पर मन्त्रिमण्डल के सतर्कता एवम शिकायत प्रकोष्ठ ने शुरू की जाँच । मन्त्रिमण्डल के सतर्कता एवम शिकायत प्रकोष्ठ ने जाँच से पूर्व सांसद को लिखे पत्र संख्या 501/ll/ 18/2021/व्ही.सी. सी. /दिनांक 04/06/2021 द्वारा सांसद से पत्र की पुष्टि की अपेक्षा की थीं । इस पर सांसद ने विंध्यलीडर से बात करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पत्र की पुष्टि करते हुए निष्पक्ष जांच के माध्यम से दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग की है ।

गौरतलब है कि रॉबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र के सांसद ने भारत के प्रधानमंत्री को सीएमडी नार्दन कोल लिमिटेड सिंगरौली परिक्षेत्र के संरक्षण में कबाड़ ,डीजल और कोयला के भारी मात्रा में चोरी और आय से अधिक मात्रा में सम्पति के अर्जित करने के सम्बंध में पत्र लिखा था , एन सी एल के सी एम डी पर भ्र्ष्टाचार /कदाचार को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की मांग की थीं ।

रॉबर्ट्सगंज सुरक्षित संसदीय क्षेत्र से अपना दल के सासंद ने प्रधानमंत्री को 2 जून 2021 को लिखे पत्र में सोनभद्र के साथ साथ सीमावर्ती प्रान्तों के तट पर स्थित औद्योगिक क्षेत्रों में हो रहे भृष्टाचार के खेल को लेकर कहा था कि महोदय( प्रधानमंत्री) जी जहाँ आप द्वारा एक ओर नए भारत के निर्माण में नित्य नई कवायद की जा रही हैं, वहीं भारत के नवरत्न कम्पनी में से एक नार्दन कोल लिमिटेड के मौजूदा सी एम डी अपने कृपा पात्रों के माध्यम से सैकड़ो करोड़ रूपयों की चोरी, की और कराई जा रही हैं ।

सांसद ने अपने पत्र में सी एम डी और उनके प्रिय अधीनस्थों एवम अन्य कृपा पात्रों पर सीधे आरोप लगाते हुए लिखा था कि आज जब देश covid 19 के चलते अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में एड़ी चोटी का जोर लगाने के बाद भी लगभग परेशान हैं ,और भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री जी मजदूर, किसान ,बेरोजगार और आम आदमी के लिए रात दिन एक कर देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में लगे हैं वही एन सी एल के मौजूदा सी एम डी सरकार की मंशा पर पानी फेरने व अच्छे उद्देश्यों की हत्या करने में लगे हैं ।

सांसद ने अपने पत्र में स्थानीय नागरिकों के हवाले से कोयला/डीजल , चोरी के तरीकों के बारे में लिखा है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में एन सी एल की खदानों से कोयला लाद कर जाने वाली सेटिंग वाली ट्रकों को किस प्रकार ब्रेक फेल के नाम पर धर्मकांटे के बगल से निकाल दिया जाता हैं, जिस पर लदा हजारो टन कोयला सरेआम नाक के नीचे से निकाल कर चोर बाजार में बेच कर करोड़ों करोड़ रुपये का एन सी एल को चूना लगा दिया जाता हैं ।

इतना ही नहीं मालगाड़ी से लद कर जाने वाला कोयले की भी उस समय चोरी की जाती हैं, जब सेटिंग के चलते मालगाड़ी खदान से निकाल कर बाहर खडा कर दिया जाता हैं ,पर सैकड़ो हजारों की तादाद में प्राइवेट मजदूरों को लगा कर कोयला उतार लिया जाता हैं और फिर उसे भी चोरबाजार में बेच दिया जाता हैं ।और इस प्रकार नवरत्न कम्पनी को करोड़ो रूपये का चूना लगाया जाता है

सासंद अपने पत्र में आगे खुलासा करते हुए लिखते हैं कि अभी कुछेक वर्ष पूर्व गली गली कबाड़ बेचने वाला शख्स सी एम डी की कृपा पात्रता के चलते आज करोंडो अरबों रुपयों का मालिक है ।कई बड़े महानगरों में उसकी आलीशान कोठी ,बंगले और कम्पनियां चल रही हैं ।

सांसद आगे लिखते हैं कि इसी तरह कभी पेंड के नीचे बैठ कर पंचर बनाने वाले एक अन्य व्यक्ति रातो रात प्रबन्ध निदेशक का चहेता होने के कारण न सिर्फ करोड़पति बन गया बल्कि आज पचासों ट्रकों ,कई पांच सितारा होटलों और पेट्रोल पंपों का मालिक बना हुआ है ।उक्त व्यक्तियों के पास अचानक अकूत सम्पति कहा से आई इसकी जांच होनी चाहिए ।प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में सांसद ने इनके अलावा प्रबन्ध निदेशक के सिंडिकेट में अन्यों के भी शामिल होने की बात कही है, जिसमे कई तो निदेशक महोदय के मातहत भी है ।

सांसद ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में भ्र्ष्टाचार के इस खेल में शामिल सी एम डी सहित प्रत्येक व्यक्ति/अधिकारियों की ,चोरबाजारी करने वालो के साथ सांठ गांठ की, आय से अधिक सम्पति की जांच करा कर कड़े प्रशासनिक कार्यवाही की मांग की है ।

उल्लेखनीय हैं कि सोनभद्र जनपद की सीमा पर स्थित एन सी एल की 11 खदानों में से 5 सोनभद्र में तो शेष 6 खदान मध्य प्रदेश के सिंगरौली क्षेत्र में हैं ।इनके अतिरिक्त कई बड़े बिजली पावर हाउस भी मौजूद हैं ।इन औद्योगिक क्षेत्रों/खदानों से दशकों से डीजल ,कबाड़ और कोयला चोरी का खेल प्रशासनिक संरक्षण में चलता आ रहा है, सूत्रों की माने तो मालगाड़ी से उतरने वाले कोयले को लादने व बेचने के लिए बाकायदा पुलिसिया लीज दी जाती है।

जिसकी रकम लाखों करोड़ों में होती हैं और इसमें समाज के तथाकथित सफेदपोशों के भी शामिल होने की आवाजें उठती रही हैं । अब जबकि खुद सत्ता के साझेदार सांसद ने भारत के सबसे बड़े मुखिया को पत्र लिखकर भ्र्ष्टाचार के खेल की जांच की मांग की है तो देखना है कि क्या कुछ बड़ी प्रशासनिक कार्यवाही हो सकती हैं ?हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसद को पत्र प्राप्ति की पुष्टि तो कर दी है किन्तु क्या कार्यवाही करेंगें इसके परिप्रेक्ष्य में कुछ भी नहीं कहा है ।

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